मुजफ्फरनगर में परिवहन विभाग का सख्त प्रवर्तन अभियान, 19 वाहन निरुद्ध, 11.22 लाख का जुर्माना

मुजफ्फरनगर। जनपद में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा 21 एवं 22 जनवरी को व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया गया। इस दौरान एआरटीओ सुशील मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 19 वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई। इनमें चार स्कूल वाहन, दो ट्रैक्टर, सात ओवरलोड वाहन तथा तीन बिना परमिट संचालित वाहन शामिल हैं। सभी निरुद्ध वाहनों को मखियाली चौकी में खड़ा कराया गया।

प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान यह पाया गया कि कई वाहन बिना आवश्यक प्रपत्रों के सड़कों पर दौड़ रहे थे, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी बल्कि आमजन, विशेषकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही थी। जांच में सामने आया कि कुछ स्कूल वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र, बिना बीमा, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बिना परमिट के संचालित किए जा रहे थे। ऐसे तीन स्कूल वाहनों को तत्काल प्रभाव से निरुद्ध करते हुए उनके विरुद्ध 95 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया गया।

इसके अतिरिक्त ओवरलोडिंग के मामलों में भी परिवहन विभाग ने सख्ती दिखाई। सात ओवरलोड वाहनों को नियमों के उल्लंघन के चलते निरुद्ध कर उनके खिलाफ भारी आर्थिक दंड लगाया गया। इसी क्रम में बिना परमिट चल रहे तीन वाहनों का चालान कर उन्हें भी मखियाली चौकी में निरुद्ध किया गया। पूरे अभियान के दौरान कुल 11 लाख 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो यह दर्शाता है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के प्रति विभाग अब किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

एआरटीओ सुशील मिश्रा ने बताया कि यह कार्रवाई संयुक्त रूप से एआरटीओ प्रवर्तन एवं यात्री कर अधिकारी द्वारा संपादित की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना, ओवरलोडिंग पर रोक लगाना तथा विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग आगे भी इसी प्रकार नियमित रूप से जांच अभियान चलाता रहेगा ताकि नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा सके।परिवहन विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूल वाहनों से विद्यालय न भेजें जिनके प्रपत्र समाप्त हो चुके हों या जिनकी भौतिक स्थिति खराब हो। अभिभावकों से कहा गया है कि वे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह सुनिश्चित करें कि जिस वाहन से उनका बच्चा स्कूल जाता है, उसके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, परमिट और चालक के पास वैध लाइसेंस अवश्य हो।विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें वाहन संचालकों, स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और प्रशासन सभी की समान भूमिका है। नियमों का पालन कर ही दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और सुरक्षित यातायात व्यवस्था कायम की जा सकती है।

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