तहसील बुढ़ाना में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का एक सराहनीय उदाहरण देखने को मिला, जहां उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कृष्णकांत विश्वकर्मा के जिला मुख्यालय जाने के बावजूद जनसुनवाई का कार्य बाधित नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों के चलते एसडीएम को मुख्यालय जाना पड़ा, लेकिन उनके स्पष्ट निर्देशों के कारण तहसील में आने वाले फरियादियों को निराश नहीं होना पड़ा। उनकी अनुपस्थिति में स्टेनोग्राफर नगमा अंसारी ने सक्रियता दिखाते हुए स्वयं मोर्चा संभाला और तहसील पहुंचने वाले लोगों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं।
सोमवार सुबह से ही तहसील परिसर में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। इनमें भूमि विवाद, राशन कार्ड, वृद्धा और विधवा पेंशन, चकबंदी, जन्म प्रमाण पत्र और पुलिस से जुड़ी शिकायतें प्रमुख थीं। जब फरियादियों को यह जानकारी मिली कि एसडीएम मुख्यालय गए हुए हैं, तो कई लोग मायूस होकर लौटने लगे। इसी दौरान स्टेनोग्राफर नगमा अंसारी ने तत्परता दिखाते हुए सभी फरियादियों को वापस बुलाया और एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं।
नगमा अंसारी ने सभी प्रार्थना पत्रों को विधिवत रजिस्टर में दर्ज किया और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी शिकायतों को एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत कर संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर अग्रसारित किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने मौके पर ही कई मामलों में संबंधित राजस्व और पुलिस कर्मियों को फोन कर निर्देश भी दिए, जिससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सके।
स्टेनोग्राफर नगमा अंसारी ने बताया कि एसडीएम का सख्त निर्देश है कि कोई भी फरियादी तहसील से बिना सुने और बिना कार्यवाही के न लौटे। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है और उसी दिशा में कार्य किया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप रोजाना जनसुनवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस पहल से फरियादियों में संतोष और भरोसा देखने को मिला। गांव उमरपुर से आए बुजुर्ग किसान राजपाल सिंह ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि आज उनका काम नहीं हो पाएगा, लेकिन स्टेनोग्राफर द्वारा समस्या सुनने और मौके पर ही लेखपाल को निर्देश देने से उन्हें राहत मिली। वहीं पेंशन से जुड़ी समस्या लेकर आई एक विधवा महिला ने भी प्रशासन के इस व्यवहार की सराहना की।
तहसील कर्मचारियों के अनुसार, दिनभर में करीब दो दर्जन से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिन्हें आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दिया गया। एसडीएम की अनुपस्थिति में भी इस तरह की सक्रियता ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासनिक कार्य बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से संचालित किए जा सकते हैं। इस पहल से क्षेत्र की जनता का प्रशासन पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।















