मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन ने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के सहारे राजनीतिक ताकत हासिल करने के बावजूद अब उन्हें नजरअंदाज करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जिले की नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में मनोनीत सभासदों की सूची में एक भी मुस्लिम को स्थान न देकर रालोद ने भाजपा जैसी मानसिकता का परिचय दिया है। साजिद हसन के अनुसार, यह कदम न केवल मुस्लिम समाज के साथ अन्याय है, बल्कि उनके भरोसे के साथ भी धोखा है।
उन्होंने रालोद के मंत्री अनिल कुमार और अन्य विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सभी मुस्लिम वोटों के दम पर सदन तक पहुंचे हैं, लेकिन जब प्रतिनिधित्व देने की बात आई तो उन्होंने पूरी तरह से किनारा कर लिया। साजिद हसन ने यह भी कहा कि हाल ही में अनिल कुमार द्वारा सपा विधायक पंकज मलिक के खिलाफ बयानबाजी के दौरान मुस्लिमों के सम्मान की बात करना केवल दिखावा था, क्योंकि वास्तविकता में उन्हें कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
सपा नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से मुस्लिमों को टिकट और मनोनीत पदों से दूर रखती आई है, लेकिन अब रालोद ने भी उसी राह पर चलते हुए अपने ही मुस्लिम कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को उनकी “हैसियत” दिखाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि रालोद के झंडे तले काम करने वाले मुस्लिम कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया गया है कि पार्टी में उनकी कोई अहमियत नहीं है।
साजिद हसन ने कहा कि यह फैसला न केवल राजनीतिक रूप से गलत है, बल्कि सामाजिक संतुलन के लिए भी नुकसानदायक है। उन्होंने मांग की कि रालोद अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे और सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कदम उठाए। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज से भी अपील की कि वे ऐसे राजनीतिक दलों से सावधान रहें जो चुनाव के समय उनका समर्थन लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।















