मुजफ्फरनगर। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शालू सैनी ने एक अनोखी और प्रेरणादायी पहल की है। वह अब तक 501 कृष्ण प्रतिमाएं और भागवत गीता विभिन्न परिवारों को भेंट कर चुकी हैं। उनका उद्देश्य यह है कि हर परिवार अपने घर में भगवान को विराजमान रख सके और प्रतिदिन गीता का पाठ कर धर्म ज्ञान अर्जित करे।शालू सैनी का मानना है कि धर्म और आध्यात्मिकता जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करते हैं। उनका कहना है कि कृष्ण प्रतिमा घर में स्थापित करने से वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है। वहीं भागवत गीता का पाठ व्यक्ति को धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक साबित होता है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म का यह संदेश है कि गीता हर किसी को पढ़नी चाहिए और जीवन में उसका अनुसरण करना चाहिए।शालू सैनी ने बताया कि जब से उन्होंने अंतिम संस्कार सेवा से जुड़े कार्य शुरू किए हैं, तभी से उनकी आस्था और भगवान के प्रति प्रेम और गहरा होता चला गया है। इसी प्रेरणा से उन्होंने निश्चय किया कि हर वर्ष जन्माष्टमी पर सैकड़ों परिवारों तक कृष्ण प्रतिमा और भागवत गीता पहुंचाई जाए। खासतौर से उन परिवारों तक यह भेंट दी जाती है जो आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से इन्हें खरीद नहीं पाते। उनकी इस सेवा भावना से कई गरीब और जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा–पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिकता फैलाने का भी माध्यम है। उनकी पहल से अनेक परिवारों में धार्मिक वातावरण बना है और युवा पीढ़ी भी प्रेरित हो रही है। कई जगहों पर छोटे बच्चे अब प्रतिदिन गीता का पाठ करने लगे हैं। इससे न केवल उनमें आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ रहा है बल्कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों की समझ भी विकसित हो रही है।शालू सैनी ने यह भी कहा कि भागवत गीता जीवन का मार्गदर्शन करने वाली पुस्तक है। इसमें वर्णित उपदेश और ज्ञान हर युग में प्रासंगिक हैं। उनका विश्वास है कि अगर हर व्यक्ति गीता का अध्ययन करे और अपने जीवन में उतारे तो समाज से हिंसा, ईर्ष्या और नकारात्मकता स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।उन्होंने बताया कि कृष्ण की प्रतिमाएं भले ही कई रूपों में उपलब्ध हैं, लेकिन जिन प्रतिमाओं को उन्होंने घर–घर पहुंचाया है, उन्हें ठाकुर जी के रूप में पूजा जाता है। इससे लोगों की आस्था और भी मजबूत हो रही है और धार्मिक माहौल का विस्तार हो रहा है।इस अनूठी पहल ने समाज में एक नई चेतना जगाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शालू सैनी की यह सेवा अनुकरणीय है। उनके प्रयास से धर्म के प्रति प्रेम और श्रद्धा तो बढ़ ही रही है, साथ ही युवा पीढ़ी में अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति गर्व की भावना भी विकसित हो रही है।इस प्रकार शालू सैनी ने जन्माष्टमी को केवल उत्सव का अवसर न मानकर इसे सेवा और धर्म प्रचार का माध्यम बनाया है। उनका संकल्प है कि आने वाले वर्षों में वह हजारों परिवारों तक कृष्ण प्रतिमा और भागवत गीता पहुंचाएंगी ताकि हर घर में भक्ति, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का दीपक प्रज्वलित हो सके।















