लावारिसो की बहन बनकर उनका अंतिम संस्कार पूरे विधी विधान से किया: शालू सैनी

भास्कर न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखंड

मुजफ्फरनगर। लावारिसों की वारिस के नाम से क्रांतिकारी शालू सैनी ने आज फिर लावारिस मृतक को अपना नाम देकर उनका अंतिम संस्कार कर पंच तत्वों में विलीन किया। लावारिसों की वारिस ने दो लावारिसो की बहन बनकर उनका अंतिम संस्कार पूरे विधी विधान से किया। लावारिसों की वारिस के नाम से जानी जाने वाली लावारिसों की वारिस क्रांतिकारी शालू सैनी ने कोरोना काल के समय में जब अपने ही अपनों से दूर भाग रहे थे,तब लावारिसों के वारिस के रूप मे उभर कर आई क्रांतिकारी शालू सैनी ने सभी लावारिसों को अपना नाम देकर मुखाग्नि देने का प्रण लिया। और आज तक अपने प्रण को बखूबी निभा रही हैं। कहने में कितना आसान लगता हैं समाज सेवी, मगर उतना ही कठिन होता हैं समाज सेवा करना। समाज सेवा के नाम पर अपना प्रचार प्रसार करने वाले समाज सेवी नहीं होते बल्कि वह सब लोग ‘एक दर्जन आलू दो दर्जन दयालू’ कहावत को चरितार्थ करते हैं। क्योकि जो समाज सेवा करता हैं वह सब अखबारों की सुर्खिया नहीं बल्कि अपनी समाज सेवा से वास्ता होना चाहिए जैसा कि आज लावारिसों की वारिस क्रांतिकरी शालू सैनी को अपनी समाज सेवा से लगाव हैं। उनको अखबारों की सुर्खियों में रहने का सोक नहीं हैं। उनका कहना हैं कि जिसको मेरी सेवा अच्छी लगे वो मेरी सेवा के बारे में चर्चा कर सकता हैं।

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