ईरान जंग के बीच शहबाज शरीफ की सऊदी अरब में पेशी,

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दरमियान सऊदी अरब और पाकिस्तान में तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्टों से पता चलता है कि सऊदी अरब पाकिस्तान से नाराज चल रहा है और उसके बुलावे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जेद्दा पहुंचे थे। गुरुवार को शहबाज ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इसके पहले पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने सऊदी का चक्कर लगाया था।

ईरान के खिलाफ सऊदी ने पाकिस्तान से मांगा समर्थन

बताया जा रहा है कि इन मुलाकातों से पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि ईरानी हमलों को रोकने के लिए रियाद ने इस्लामाबाद से सक्रिय समर्थन की मांग की है। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने पिछले साल एक ऐतिहासिक समझौता किया था, जिसके अनुसार किसी एक देश पर हमला दूसरे पर आक्रमण माना जाएगा।अमेरिका और इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों में लगातार मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है। रियाद का कहना है कि अब यही समय है जब पाकिस्तान को समझौते के तहत ईरानी हमलों को रोकने के लिए सऊदी के साथ आना चाहिए।

पाकिस्तान ने दिया सऊदी को भरोसा

क्राउन प्रिंस से मुलाकात के बाद शहबाज के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा, प्रधानमंत्री ने इन मुश्किल समय में सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की एकजुटता और समर्थन जाहिर किया। शरीफ ने मुलाकात के दौरान MBS को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान हमेशा सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
पिछले सप्ताह ही सऊदी रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने ईरान के हालिया हमलों और अपने संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत उनका जवाब देने के तरीकों पर बात की। समझौते के तहत पाकिस्तान संकट के समय सऊदी अरब का साथ देने के लिए बाध्य है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा हमला बोल दिया था, जिसके बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध भड़क गया है। शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान की आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले खर्ग द्वीप हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की जानकारी दी। इस बीच अमेरिका ने अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का फैसला किया है।

अमेरिका भेज रहा 2500 मरीन

मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा समुद्री यातायात और क्षेत्रीय ठिकानों पर हमलों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिका पोत यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से फॉक्स न्यूज ने बताया कि इस तैनाती में लगभग 2,500 मरीन और 2,500 नाविक शामिल होंगे।

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