उज्बेकिस्तान में भीषण सूखा: देशभर की 2,000 मस्जिदों में बारिश के लिए एक साथ अदा की गई विशेष नमाज़

मध्य एशिया का मुस्लिम बहुल देश उज्बेकिस्तान इन दिनों इतिहास के सबसे गंभीर सूखे से जूझ रहा है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि शुक्रवार को देशभर की 2,000 मस्जिदों में एक साथ बारिश के लिए विशेष नमाज अदा की गई. धार्मिक नेताओं ने लोगों से कहा कि जब विज्ञान और मौसम साथ न दें, तो अल्लाह से रहमत की बारिश मांगी जाए.राजधानी ताशकंद में जुटे हजारों लोगों ने खुले मैदानों और मस्जिदों में नमाज अदा की. लोगों का कहना है कि हमने ऐसी दुआ कभी नहीं की, लेकिन बारिश इतनी देर से हो रही है कि हमें अल्लाह से रहमत मांगनी पड़ी है.

170 साल का सबसे खराब सूखा

उज़्बेकिस्तान की मौसम एजेंसी के मुताबिक इस साल ताशकंद में 170 साल में सबसे भीषण सूखा पड़ा है. पिछले 60 सालों में देश का तापमान वैश्विक औसत से तीन गुना ज्यादा बढ़ा है. इससे सूखे की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं. यानी इस बार की समस्या सिर्फ मौसम की नहीं, जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है.

क्लाइमेट चेंज ने क्यों बिगाड़े हालात?

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. जो मध्य एशिया की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हैं. पांचों मध्य एशियाई देशों में जनसंख्या और अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जबकि पानी के स्रोत उसी गति से घट रहे हैं. इस वजह से उज़्बेकिस्तान जैसे देशों पर पानी का दबाव कई गुना बढ़ गया है.

बारिश न होने से किन चीजों पर पड़ रहा असर?

बारिश न होने से फसलें सूख रही हैं, झीलें सिकुड़ रही हैं, बिजली और सिंचाई सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है. ऐसे में लोग आखिरी उम्मीद के रूप में दुआओं की ओर लौट रहे हैं. मौसम विज्ञान से लेकर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें तक साफ कह रही हैं कि यह सिर्फ मौसमी देरी नहीं, बल्कि गंभीर और लंबा जलवायु संकट है. और जब तक बड़े पैमाने पर पर्यावरण सुधार नहीं होते, देश को ऐसे संकट लगातार झेलने पड़ सकते हैं.

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