राजस्थान में डेक्स्ट्रोमेथार्फन युक्त खांसी की सिरप से बच्चों की मौतों का मामला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न जिलों में कई बच्चों की असामयिक मौतें इस सिरप के सेवन के बाद दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इन मौतों के पीछे संदिग्ध सिरप बैच को प्राथमिक कारण माना जा रहा है। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने उक्त बैच की सभी सप्लाई को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है, जो सिरप के उत्पादन, वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया की विस्तृत जांच करेगी। इस कमेटी में चिकित्सा विशेषज्ञ और औषधि नियंत्रण के अधिकारी शामिल हैं, जो संभावित दोषों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभिभावकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि कम उम्र के बच्चों को फिलहाल खांसी की इस तरह की किसी भी सिरप का सेवन न करवाया जाए। इसके अलावा, बच्चों में खांसी या जुकाम के लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेक्स्ट्रोमेथार्फन वाली सिरप का इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी के बिना बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों और दवा विक्रेताओं को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य प्रणाली और दवा सुरक्षा नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब बच्चों की दवा लेने से पहले गुणवत्ता और सुरक्षा के बारे में विशेष सतर्कता बरतने लगे हैं। सरकार की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतों के लिए सिरप की गुणवत्ता दोषी है या अन्य कारक जिम्मेदार हैं।















