चमोली में हुए टनल हादसे के बाद लापता श्रमिकों की तलाश जारी .

चमोली टनल हादसे का मंजर दिल दहला देने वाला था। अचानक सुरंग में करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी व पत्थर तेज गति से टनल के अंदर घुस आए। इसके धक्के से कई लोग दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए। मलबे के धक्के से कुछ लोग टनल के बाहर की ओर आ गए।मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। टनल में कई जगह से मलबा आने से ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। कुछ लोग दम घुटने के कारण मलबे में आगे चल नहीं पा रहे थे। जेसाल गांव के नीचे यहा हादसा हुआ। हैरानी के बात यह सामने आ रही है कि मलबा दो दिन से गिर रहा था, लेकिन परियोजना प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। 

चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में मलबा और पानी भरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र देहरादून के अनुसार करीब तीन किलोमीटर लंबी टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी आने से अंदर काम कर रहे लोग फंस गए थे।घटना में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी।

इनमें से 12 घायलों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया है, जबकि सात लोगों की मौत की सूचना है। तीन लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएप समेत अन्य एजेंसियों का सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं।

SDRF सेनानायक अर्पण यदुवंशी के निर्देशन में एसडीआरएफ की छह टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं। टनल के भीतर मलबा, पानी, सीमित स्थान और अन्य चुनौतियों के बीच रेस्क्यू विशेषज्ञ सावधानी और समन्वय के साथ सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। रेस्क्यू किए गए घायलों को अस्पताल भेजा गया है। इनमें 11 का उपचार जिला चिकित्सालय गोपेश्वर और एक घायल रोहित पाण्डे का उपचार बेस अस्पताल श्रीनगर में चल रहा है।लुकास टोपनो, झारखंड; चेतन पोयाम, छत्तीसगढ़ और देवनाथ, छत्तीसगढ़ की तलाश की जा रही है। प्रशासन के अनुसार खोज एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण प्रभावितों के आंकड़ों में आवश्यकतानुसार बदलाव संभव है।

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