सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान और तुर्की के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने की कोशिशों ने अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में नई खटास पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब ने तुर्की से ‘कान’ फाइटर जेट और पाकिस्तान से जेएफ-17 लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है, जिस पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि सऊदी इन विमानों की खरीद आगे बढ़ाता है तो उसे F-35 Lightning II देने पर पुनर्विचार किया जा सकता है। नवंबर 2025 में सऊदी नेतृत्व ने वॉशिंगटन दौरे के दौरान एफ-35 खरीदने को लेकर प्रारंभिक सहमति बनाई थी। एफ-35 को अमेरिका का सबसे उन्नत और घातक स्टेल्थ फाइटर जेट माना जाता है, जो अत्याधुनिक तकनीक और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता से लैस है। दूसरी ओर सऊदी अरब अपने रक्षा आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर सामरिक स्वायत्तता बढ़ाना चाहता है। तुर्की के स्वदेशी ‘कान’ कार्यक्रम और पाकिस्तान-चीन के संयुक्त प्रोजेक्ट जेएफ-17 में सऊदी की रुचि इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब देखना होगा कि यह खींचतान सऊदी-अमेरिका रक्षा सहयोग को किस दिशा में ले जाती है।
अमेरिका ने क्यों जताया एतराज?
1. तुर्की और पाकिस्तान लगातार अमेरिका के बाजार को खत्म कर रहा है. दोनों देश ने अब तक लीबिया, इंडोनेशिया जैसे देशों को हथियार बेचे हैं. पहले ये देश अमेरिका से हथियार खरीदते थे. अब ये दोनों देश मिडिल ईस्ट के देशों को हथियार बेचने की कोशिश कर रहे हैं. यह सीधे तौर पर अमेरिका के लिए झटका है.
2. अमेरिका सऊदी को एफ-35 देने जा रहा है. ऐसे में वाशिंगटन नहीं चाहता है कि एफ-35 का इस्तेमाल करने वाला कोई मुल्क किसी दूसरे देश का फाइटर जेट इस्तेमाल करे. पाकिस्तान का जो जेफ-17 है, वो चीन निर्मित है. अमेरिका ने इसलिए सऊदी का पेंच कसा है.
3. ट्रंप प्रशासन में पूर्व वरिष्ठ रक्षा अधिकारी बिलाल सहाब ने मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए कहा- मुझे नहीं लगता कि तुर्की का लड़ाकू विमान सऊदी अरब के पहले से ही व्यापक सैन्य बेड़े में फिट बैठता है. उनके पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एफ-15 विमान हैं. यूरो टाइफून है और वे जल्द ही एफ-35 प्राप्त करने वाले हैं. अमेरिका सऊदी को 48 एफ-35 बेचेगा.
बैकफुट पर सऊदी, आगे क्या?
हथियार खरीदी के नाम पर सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के साथ इस्लामिक नाटो बनाने की तैयारी में था. हालांकि, अब अमेरिकी की नाराजगी की वजह से बैकफुट पर चला गया है. सऊदी ने अमेरिका को यह आश्वासन दिया है कि रियाद किसी भी दूसरे मुल्क से हथियार नहीं खरीदेगा.















