मुजफ्फरनगर में सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश, जनपद मुजफ्फरनगर द्वारा एनएसएस कैंप, अतिशय क्षेत्र वहलना में सड़क सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के निर्देशों एवं जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में “सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा” अभियान के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता एआरटीओ प्रवर्तन सुशील कुमार मिश्र ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान एआरटीओ प्रवर्तन ने उपस्थित सभी एनएसएस वालंटियर्स को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और अपने परिवार व समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग, ओवरस्पीड से बचाव, नशे में वाहन न चलाना और ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी एनएसएस डॉ वर्चसा को सड़क सुरक्षा शपथ का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया।डॉ वर्चसा ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं, बल्कि जन जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग यदि जिम्मेदारी समझ ले तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है। एनएसएस जैसे मंचों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जा सकती है। उन्होंने परिवहन विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित होनी चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ राजीव कुमार ने किया। उन्होंने भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों के आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकांश दुर्घटनाएं मानवीय त्रुटियों के कारण होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग यातायात नियमों का गंभीरता से पालन करें तो हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।कार्यशाला के अंत में परिवहन विभाग की ओर से सभी एनएसएस वालंटियर्स को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों से संबंधित कैलेंडर और जागरूकता पंपलेट वितरित किए गए, ताकि वे स्वयं भी जानकारी रखें और दूसरों तक भी संदेश पहुंचाएं। कार्यक्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री ज़ैनब, आरुषि तथा अन्य वालंटियर्स की सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह कार्यशाला युवाओं में जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना जागृत करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुई।















