ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया की तेल सप्लाई पर भी पड़ सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ने उसके बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया, तो वे लाल सागर का अहम समुद्री रास्ता बंद करने के लिए तैयार रहें. अगर ऐसा होता है तो दुनिया के दो बड़े तेल रूट एक साथ प्रभावित हो सकते हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए चिंता की वजह बन सकता है.
IRGC के आदेश पर होगा काम
एक सूत्र ने दावा किया कि बाब-अल-मंदेब को कब बंद करना है, इसका फैसला यमन में मौजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रतिनिधि करेंगे. वहीं, हूतियों के करीबी लोगों का कहना है कि वे किसी भी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसी बीच हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर भी मिसाइल हमले किए हैं. उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले एयरपोर्ट पर बमबारी की. इससे दोनों पक्षों के बीच चार साल से चला आ रहा युद्धविराम भी टूट गया हैमिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर रेड सी में जहाजों या तेल एक्सपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला होता है, तो इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. सऊदी अरब अपने तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा रेड सी के यानबू बंदरगाह से करता है. ऐसे में वहां किसी भी तरह की बाधा से पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो सकती है. एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान इस रणनीति के जरिए अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है. अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान हूतियों को हथियार, फंड और ट्रेनिंग देता है, जबकि तेहरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है. आने वाले दिनों में इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर नजर आ सकता है.























































