महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को नागपुर के नवनियुक्त पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल की आरएसएस की प्रशंसा को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा केवल पुलिस बल के प्रति होनी चाहिए।राज ठाकरे ने विश्वास नांगरे को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह सार्वजनिक रूप से आरएसएस की प्रशंसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।एमएनएस प्रमुख ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अगर आपको संघ से लगाव है, तो इसे अपने तक ही सीमित रखें, या अगर आप सार्वजनिक रूप से बोलना चाहते हैं, तो नौकरी से इस्तीफा देकर संघ या भाजपा में शामिल हो जाएं।”
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब कांग्रेस ने आईपीएस अधिकारी के विवादित भाषण की जांच की मांग की। नागपुर के पुलिस आयुक्त बनने के बाद उनका एक वीडियो गुरुवार को वायरल हुआ। जिसमें वह सकल हिंदू समाज के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सकल हिंदू समाज एक दक्षिणपंथी संगठन है जिसके खिलाफ महाराष्ट्र भर में कथित घृणास्पद भाषण के लिए कई एफआईआर दर्ज हैं। यह भाषण उन्होंने नागपुर पुलिस आयुक्त नियुक्त होने के बाद दिया था।राज ठाकरे ने कहा, “ऐसा लगता है कि आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल अचानक दोहरी निष्ठा दिखाने की इच्छा महसूस कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी होने के नाते, उनकी निष्ठा पूरी तरह से पुलिस बल के कर्तव्यों के प्रति होनी चाहिए। लेकिन यहां, नांगरे पाटिल आरएसएस के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करने के लिए विवश हैं।”
ठाकरे ने कहा कि राज्य भर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं और भले ही इन्हें गैर-राजनीतिक बताया जा रहा हो, वास्तव में ये राजनीतिक हैं। एमएनएस प्रमुख ने कहा कि अगर कोई इस बात की पड़ताल करे या विचार करे कि इन आयोजनों का आयोजन कौन कर रहा है और उनके असली मकसद क्या हैं, तो इनके पीछे के लोग बेनकाब हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति, विशेषकर पुलिस अधिकारी को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर नांगरे पाटिल जाकर आरएसएस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। क्या आप यह भूल गए हैं कि आप एक पुलिस अधिकारी हैं और एक अधिकारी से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है? वैसे भी, पसंदीदा अधिकारियों के लिए कई वर्षों से “पुनर्वास गारंटी योजना” चल रही है। आपका भी पुनर्वास किया जाएगा।
‘खाकी रंग पुलिस का है या आरएसएस का ?’
पुलिस अधिकारी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा, “हम सभी को यही लगता था कि नांगरे पाटिल की वर्दी का खाकी रंग पुलिस बल का है। हमें अब पता चला है कि यह रंग संघ की पूर्व खाकी वर्दी का है।”
मुख्यमंत्री के लिए दोहरी निष्ठा स्वीकार्य है या नहीं यह सवाल उठाते हुए राज ठाकरे ने कहा कि चलिए नांगरे पाटिल को छोड़ देते हैं, हो सकता है कि वे रास्ता भटक गए हों। लेकिन क्या मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों के लिए ऐसी दोहरी निष्ठा स्वीकार्य है?
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को याद दिलाया कि भविष्य में जब कोई अधिकारी किसी अन्य संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेता है तो उन्हें उसकी आलोचना नहीं करनी चाहिए।
‘फड़नवीस गलत मिसाल कायम कर रहे हैं’
राज ठाकरे ने कहा कि जब कोई सत्ताधारी दल किसी अधिकारी के कार्यों का समर्थन करके (या यहां तक कि चुप रहकर, जो समर्थन का एक रूप ही है) यह भूल जाती है कि वे क्या गलत मिसालें कायम कर रहे हैं, तो वे यह भी भूल जाते हैं कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ रहे हैं।
ठाकरे ने 2012 में एमएनएस द्वारा किए गए एक विरोध मार्च को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय एक पुलिस कांस्टेबल उनके पास आया था और पुलिस के समर्थन में खड़े होने के लिए उन्हें बधाई दी थी। लेकिन तत्कालीन सरकार ने उस कांस्टेबल को निष्पक्षता का उल्लंघन करने के लिए उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या वर्तमान सरकार नांगरे पाटिल के मामले में भी वही रुख अपनाएगी?
मनसे चीफ ने सलाह देते हुए कहा, “नांगरे पाटिल आप एक सक्षम अधिकारी हैं। कम से कम अपनी अंतरात्मा को राजनीतिक दलों और संगठनों के हाथों गिरवी न रखें।” इस बीच, महाराष्ट्र में कांग्रेस ने पाटिल के भाषण की जांच की मांग की है। पार्टी ने अधिकारी की निष्पक्षता और सेवा नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र में जारी सियासी तूफान के और आगे बढ़ने की संभावना है। जिसका खामियाजा उद्धव ठाकरे को भुगतने को मिल सकता है। राज्य मंत्री गुलाबराव पाटिल ने शुक्रवार को दावा किया कि “ऑपरेशन टाइगर 2.0” शुरू हो गया है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के 14 से ज्यादा विधायक जल्द ही सत्तारूढ़ गुट में शामिल हो जाएंगे। गुलाबराव पाटिल का यह बयान शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद आया है।















