भास्कर न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखंड
सहारनपुर। योगी सरकार द्वारा जनता की सुविधा के लिए एक जनसुनवाई समाधान योजना शुरू की गई थी।जिसके माध्यम से किसी भी परेशानी के होने पर उत्तरा प्रदेश का कोई भी नागरिक किसी भी विभाग की शिकायत घर बैठे कर सकता था।यह एक ऑनलाइन प्रणाली थी जिसमे शिकायत प्राप्त होने के बाद जल्द से जल्द उसका निस्तारण किया जाना आवशयक होता था। निस्तारण की गुणवत्ता परखने के लिए राजधानीं लखनऊ में एक टीम निर्धारित की गई थी जो समय समय पर सभी निस्तारित शिकायतों के शिकायतकर्ता को फ़ोन के माधयम से संपर्क करके उसका फीडबैक लिया करती थी। जिसके कारण अधिकारी द्वारा कोई भी गलत निस्तारण नहीं किया जाता था। परन्तु आज स्थिति बदल चुकी है। विकास प्राधिकरण के अवर अभियंताओं एवं विभाग के मेट ने जनसुनवाई समाधान का मजाक बना कर रख दिया है। जिसका मुख्य कारण राजधानी से किये जाने वाले सर्वे में खासी कमी आना बताया जा रहा है। विकास प्राधिकरण में किसी भी प्रकार की शिकायत जनसुनवाई से करने के बाद निस्तारण में कई दिनों की देरी जानबूझकर की जाती है जिसके कारण की गई शिकायत की प्रकृति बदल जाती है एवं झूठा निस्तारण या मात्र टाल देने वाला निस्तारण करने में सहायता मिल जाती है। बड़ा सवाल है की क्या मुख्यमंत्री द्वारा चलाई गई इस योजना का मजाक बनाते विभाग के अधिकारीयों को किसी बात का कोई डर नहीं रह गया है या इसका दूसरा कारण यह भी हो सकता है की जब सैयां भये कोतवाल तो डर कहे का होय।















