झारखंड की राजनीति में इन दिनों बड़ा उलटफेर होने की आहट सुनाई दे रही है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह खबर बाहर आ रही है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो दिन पहले दिल्ली में भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात की है। यही नहीं, बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं। यह दावा किया जा रहा है कि यह केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक रूप से साथ आने की प्रारंभिक सहमति भी बन चुकी है। इस खबर के सामने आते ही प्रदेश की राजनीतिक फिजा में हलचल और गर्माहट बढ़ गई है।
जानकारों का मानना है कि झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह मुलाकात एक बड़ा संकेत दे रही है। पिछले कुछ महीनों से राज्य में लगातार अस्थिरता और राजनीतिक खींचतान देखी जा रही है। भ्रष्टाचार मामलों, आंतरिक खींचतान और विपक्ष के हमलों के बीच हेमंत सोरेन की राजनीतिक स्थिति कुछ हद तक दबाव में दिखाई दे रही थी। ऐसे में भाजपा जैसे राष्ट्रीय दल से बातचीत का दावा राजनीति के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है। सूत्र बताते हैं कि यह बैठक एक शांत माहौल में हुई, जिसमें सरकार और संगठन से जुड़े कई मुद्दों पर लंबी चर्चा चली। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अंतिम निर्णय अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती स्तर पर दोनों पक्षों के बीच समझ और सहमति बन चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह गठजोड़ सच होता है, तो राज्य की राजनीति में भूचाल आना तय है। भाजपा, जो लंबे समय से झारखंड में सत्ता वापसी की कोशिश में लगी है, उसके लिए यह कदम एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। वहीं हेमंत सोरेन के लिए यह रास्ता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिहाज से फायदेमंद माना जा रहा है। दूसरी ओर, झामुमो और महागठबंधन के कुछ नेताओं में इस संभावित बदलाव को लेकर चिंता भी देखी जा रही है।
भले ही आधिकारिक तौर पर न तो भाजपा और न ही झामुमो ने इस मुलाकात पर कोई बयान दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस खबर ने तूफान ला दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति और साफ होगी कि यह मुलाकात केवल राजनीतिक शिष्टाचार थी या झारखंड की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत।















