MNS की पोस्ट से बढ़ी सियासी सरगर्मी, ठाकरे बंधुओं के रिश्तों में फिर दरार के संकेत.

मुंबई नगर निगम चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे बंधुओं के रिश्तों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच संभावित तालमेल की चर्चाओं के बीच अब सोशल मीडिया पर आई एक पोस्ट ने सियासी हलचल मचा दी है। ‘जब दिल में प्यार ही नहीं तो…’ जैसे शब्दों वाली पोस्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों में इसे दोनों भाइयों के बीच बढ़ती दूरी का संकेत माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक विवाद की जड़ मुंबई महानगरपालिका यानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में नॉमिनेटेड पार्षदों के बंटवारे को लेकर बताई जा रही है। चुनाव परिणामों के बाद सत्ता संतुलन बनाने के लिए दोनों दलों के बीच समन्वय की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन नॉमिनेटेड सीटों पर हिस्सेदारी को लेकर सहमति नहीं बन सकी। बताया जा रहा है कि राज ठाकरे की पार्टी अपेक्षा से कम प्रतिनिधित्व मिलने से नाराज़ है, जबकि उद्धव गुट का दावा है कि सीटों का बंटवारा राजनीतिक मजबूती और संख्या बल के आधार पर किया गया है।MNS की सोशल मीडिया पोस्ट को भले ही सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना साझा किया गया हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संदेश साफ तौर पर सहयोगी दल की ओर इशारा करता है। पोस्ट के वायरल होते ही समर्थकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कई कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सम्मान’ और ‘विश्वास’ से जोड़ते हुए नेतृत्व से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रिश्ते पहले भी उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे हैं। बालासाहेब ठाकरे के दौर में एक साथ सक्रिय रहने वाले दोनों नेता बाद में अलग राह पर चल पड़े थे। समय-समय पर राजनीतिक समीकरणों के चलते नजदीकियों की चर्चा होती रही, लेकिन स्थायी समझौता अब तक नहीं हो पाया। बीएमसी जैसे प्रतिष्ठित निकाय में सत्ता साझेदारी को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ठाकरे बंधु दीर्घकालिक राजनीतिक तालमेल बना पाएंगे या फिर यह साझेदारी भी अस्थायी साबित होगी।फिलहाल दोनों दलों की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े मतभेद से इनकार किया जा रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उभरी तल्खी ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि अंदरूनी असंतोष मौजूद है। आने वाले दिनों में बीएमसी की राजनीति किस करवट बैठती है, इस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।

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