डॉ. संजीव बालियान के आवास के बाहर हंगामे पर बढ़ा विवाद,

मुजफ्फरनगर की ए-टू-ज़ेड कॉलोनी में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के आवास के बाहर रविवार देर रात हुए विवाद के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। कॉलोनी निवासी अमित बाना ने सुरक्षा में तैनात कर्मियों पर अभद्रता, मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ का आरोप लगाया है, जबकि बालियान परिवार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और प्रायोजित बताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

अमित बाना के अनुसार वह रविवार रात अपनी बहन के घर से लौट रहे थे और रास्ते में कार रोककर फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ कथित रूप से अभद्रता की और मारपीट शुरू कर दी। उनका आरोप है कि एक युवक ने बेसबॉल बैट से हमला किया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी कार में तोड़फोड़ की गई और घटना के बाद संबंधित लोग पूर्व केंद्रीय मंत्री के आवास के अंदर चले गए। अमित बाना ने यह भी आरोप लगाया कि आवास परिसर और आसपास सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है तथा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों के कारण उनसे रंजिश रखी जा रही है। घटना के विरोध में कॉलोनी के लोगों ने मौके पर पहुंचकर नारेबाजी की और निष्पक्ष जांच की मांग की।

सोमवार को डॉ. संजीव बालियान के भाई डॉ. विवेक बालियान ने प्रेसवार्ता कर परिवार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आवास का निर्माण मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ है और इसके सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कहीं भी अतिक्रमण सिद्ध होता है तो प्रशासन बिना किसी हिचक कार्रवाई करे, परिवार को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने मारपीट के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि घटना के समय डॉ. संजीव बालियान घर के अंदर थे और बाहर शोर-शराबा होने पर स्थिति देखकर वापस चले गए। किसी भी सुरक्षाकर्मी द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप तथ्यहीन है।

डॉ. विवेक बालियान ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात कुछ लोग आवास के बाहर पहुंचकर पटाखे फोड़कर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे थे। उनका कहना है कि धरने में स्थानीय लोगों की संख्या बहुत कम थी और कुछ लोगों को बाहर से बुलाया गया था। उन्होंने पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो की जांच कराने की मांग की। साथ ही मीडिया से अपील की कि किसी भी पक्ष के आरोपों को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन किया जाए। इस बीच किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने भी घटना को राजनीतिक रूप से प्रेरित और प्रायोजित बताया है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों से मिली शिकायतों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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