ढाका की हवा में जहर घुल चुका है और अब यह शहर पूरी दुनिया में प्रदूषण के मामले में बदनाम हो गया है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका लगातार वायु प्रदूषण के उच्चतम स्तर पर बनी हुई है, जिससे वहां के लोगों का जीवन संकट में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य पर्यावरण एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, ढाका की हवा में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कणों की मात्रा बेहद अधिक पाई गई है, जो सीधे फेफड़ों और दिल पर असर डालते हैं। खासकर सुबह और शाम के वक्त धुंध और धूल का इतना घना असर होता है कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं–निर्माण कार्यों की भरमार, ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कूड़ा जलाने की आदत। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस का यह शहर, जो कभी अपनी सांस्कृतिक पहचान और सुंदरता के लिए जाना जाता था, अब पर्यावरणीय विनाश का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय प्रशासन और सरकार द्वारा अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे आम नागरिकों में चिंता और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस उपाय नहीं किए गए, तो ढाका का जीवन स्तर और अधिक बदतर हो जाएगा।















