इस्लामिक देशों के साथ PM मोदी की मीटिंग!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत आए अरब देशों के बड़ें नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की है. यह प्रतिनिधिमंडल दूसरी बार भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने आया है.इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़ा है. उन्होंने गाजा के लिए पेश किए गए शांति प्रस्ताव का भी समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति की कोशिशों का भारत स्वागत करता है. प्रधानमंत्री ने ये भी बताया कि अरब दुनिया भारत के लिए सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि पड़ोसी जैसे रिश्ते वाली है. भारत और अरब के लोगों का आपसी जुड़ाव है. भारत शांति, स्थिरता और विकास के लिए अरब देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है.

पीएम मोदी ने क्यों की अरब लीग की तारीफ?
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी संदेश साझा किया है. उन्होंने लिखा कि अरब देश भारत के विस्तारित पड़ोस का हिस्सा हैं. दोनों क्षेत्रों के बीच लंबे समय से भाईचारे जैसे रिश्ते रहे हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि तकनीक, ऊर्जा, व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा. इससे दोनों पक्षों को नए अवसर मिलेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मोदी ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अरब लीग की भूमिका की सराहना की है. उन्होंने कहा कि अरब लीग लगातार संवाद और सहयोग के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रही है. भारत इन प्रयासों को सकारात्मक रूप से देखता है और आगे भी समर्थन देता रहेगा.

इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है. हालांकि भारत ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. अरब देशों के नेता इस समय भारत में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए मौजूद हैं. इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात कर रहे हैं.

किस बात पर भड़के एस जयशंकर?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में कई बड़े और असरदार बदलाव हुए हैं. इन घटनाओं का प्रभाव सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और अरब देशों के हित कई मामलों में एक जैसे हैं. इसलिए स्थिरता, शांति और समृद्धि को मजबूत करना जरूरी है. जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद हर रूप में खतरनाक है. सीमा पार आतंकवाद तो बिल्कुल अस्वीकार्य है. यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. उनका यह बयान परोक्ष रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि जिन समाजों पर आतंकवादी हमले होते हैं, उन्हें आत्मरक्षा का अधिकार है. आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता पूरी दुनिया में एक सख्त नियम होना चाहिए.

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत के सभी अरब लीग सदस्य देशों के साथ मजबूत रिश्ते हैं. अरब क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं. यह क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा का अहम स्रोत भी है. व्यापार और निवेश के लिहाज से भी अरब देश भारत के बड़े साझेदार हैं. उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा के मामलों में भी भारत और अरब देश एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं. बैठक में होने वाली चर्चा सामूहिक जरूर है, लेकिन इससे कई द्विपक्षीय रिश्तों को भी नई गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि भारत ने समय के साथ अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है. खासतौर पर तकनीक के क्षेत्र में भारत ने कई उपयोगी समाधान विकसित किए हैं. इनका लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है.

भारत और अरब देश मिलकर करेंगे चुनौतियों का सामना
भू-राजनीतिक हालात पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और जनसंख्या से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में यह बदलाव सबसे ज्यादा साफ दिखाई देता है. पिछले एक साल में वहां का पूरा नजारा काफी बदल गया है. इसका असर भारत और अरब देशों के रिश्तों पर भी पड़ता है. भारत इस क्षेत्र को अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है. इसलिए क्षेत्र में स्थिरता और संवाद भारत के लिए प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत और अरब देश मिलकर इन चुनौतियों का समाधान तलाशेंगे.

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक इस साझेदारी का सबसे बड़ा मंच है. इसकी शुरुआत मार्च 2002 में हुई थी. भारत अरब लीग का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे उसकी बैठकों में शामिल होने और बातचीत देखने-समझने की अनुमति है. अरब लीग में कुल 22 सदस्य देश शामिल हैं. भारत में हुई पहली ऐसी बैठक में सभी 22 अरब देशों ने हिस्सा लिया. इस बैठक में ओमान, फिलिस्तीन, सूडान, कोमोरोस, सोमालिया और लीबिया के विदेश मंत्री मौजूद रहे. मिस्र, यमन, सऊदी अरब और कतर ने उप मंत्रियों के स्तर पर भाग लिया है. जिबूती, अल्जीरिया, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, लेबनान, सीरिया, मॉरिटानिया और इराक ने बड़े अधिकारियों और राजनयिकों के माध्यम से प्रतिनिधित्व किया है. यह बैठक भारत और अरब दुनिया के रिश्तों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.

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