ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम हमले को लेकर बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि यदि वह इस वक्त देश के प्रधानमंत्री होते तो इस हमले से निपटने के लिए क्या कदम उठाते, तो ओवैसी ने सीधा और चुभता हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं ख्वाब नहीं देखता, मैं हकीकत में जीता हूं।” उनके इस बयान से साफ है कि वह सियासी सपनों या काल्पनिक जवाबों में भरोसा नहीं करते, बल्कि हकीकत और ठोस कार्यवाही पर जोर देते हैं।
ओवैसी ने कहा कि देश की सुरक्षा और नागरिकों की जान की रक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में आतंकवाद और हमलों के खिलाफ केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब-जब इस तरह की घटनाएं होती हैं, तब सत्ता पक्ष के नेता बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी तैयारियों की पोल खुल जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाकों में खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को और ज्यादा चौकस रहना चाहिए था। अगर जानकारी होने के बावजूद हमले होते हैं, तो यह सुरक्षा ढांचे की नाकामी है।
ओवैसी ने यह साफ किया कि प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब वह नहीं देखते, बल्कि हकीकत में जनता की आवाज उठाना ही उनका मकसद है। उन्होंने सरकार को चेताया कि महज राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर ठोस कदम उठाए जाएं ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।















