मुजफ्फरनगर में वाल्मीकि समाज के वरिष्ठ एवं सम्मानित प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री कपिल देव अग्रवाल के आवास पर पहुंचकर आगामी 3 दिसंबर को आयोजित होने वाले भगवान वाल्मीकि जी की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं स्थापना महाअनुष्ठान के लिए औपचारिक निमंत्रण भेंट किया। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे समाज की एकजुटता, गहन श्रद्धा, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ मंत्री कपिल देव अग्रवाल को इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का आग्रह व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल के आगमन के दौरान आत्मीय संवाद, सम्मानपूर्ण वातावरण और अध्यात्म से प्रेरित भावनाओं ने पूरे आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। समाज का यह निमंत्रण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न होकर, समुदाय की आस्था, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी था।
निमंत्रण स्वीकार करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि वाल्मीकि समाज की भक्ति, सेवा और पवित्र परंपराएँ भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि न केवल रामायण के रचयिता थे, बल्कि भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के ऐसे दिव्य प्रकाशस्तंभ हैं, जिनका मार्गदर्शन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महर्षि वाल्मीकि का जीवन संदेश सत्य, कर्तव्य, सामाजिक न्याय और समरसता की उस धारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने देश की सांस्कृतिक परंपराओं को सदियों से समृद्ध किया है। मंत्री ने कहा कि इस पावन महाअनुष्ठान का निमंत्रण उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि कर्तव्य, समाज के प्रति विश्वास और भावनात्मक संबंध का प्रतीक है।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी की नीति ‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास’ समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान, सुरक्षा, सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना पर आधारित है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार समाज के हर वर्ग के साथ समान आदर और जिम्मेदारी के साथ खड़ी है, और ऐसे सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों को शक्ति और संरक्षण देना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज की परंपराएँ भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, और वे पूर्ण निष्ठा के साथ इस आयोजन में सहभागी बनेंगे।
अंत में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भगवान वाल्मीकि जी की कृपा एवं समाज की एकता से सम्पन्न होने वाले इस भव्य महाअनुष्ठान के सफल, शांतिपूर्ण और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाले आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, जागरूकता और सांस्कृतिक गौरव की नयी ऊर्जा का संचार भी करेगा।















