मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की ओर से एसएसपी कार्यालय पर एक बड़ी पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में न सिर्फ जनपद मुजफ्फरनगर बल्कि आसपास के कई जिलों से सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी पहुंचे। पंचायत के दौरान उस समय माहौल और अधिक गरमा गया जब भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक गले में “धर्मेंद्र मलिक रंगदार है, कचरा माफिया मुजफ्फरनगर” लिखी तख्ती डालकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनकी इस प्रतीकात्मक विरोध शैली ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए।पंचायत को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र मलिक ने स्पष्ट कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था से है। उन्होंने कहा कि वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले कुछ लोगों ने स्वयं को ट्रांसपोर्टर बताते हुए उन पर रंगदारी मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बावजूद प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि इन आरोपों की जांच कहां तक पहुंची और आरोप लगाने वालों पर क्या कार्रवाई की गई।धर्मेंद्र मलिक ने दो टूक शब्दों में कहा कि या तो प्रशासन उन्हें रंगदार साबित करे या फिर झूठे और अनर्गल आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
उन्होंने ऐलान किया कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, वह गले में यह तख्ती डाले रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव तक ही क्यों न जाना पड़े। उनका कहना था कि यह सिर्फ उनका निजी मामला नहीं बल्कि संगठन और जनहित से जुड़ा विषय है।राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जिस घटनाक्रम की शुरुआत हुई थी, उससे उन्हें खुद अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में लोग स्वतः उनके समर्थन में पहुंच जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि पंचायत में आए लोगों को उन्होंने व्यक्तिगत रूप से नहीं बुलाया है। यह जनमानस में फैले आक्रोश और असंतोष का परिणाम है, जो आरडीएफ और कचरा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से बना हुआ है।उन्होंने आरोप लगाया कि कचरा प्रबंधन से जुड़े माफिया सक्रिय हैं और संगठन के कार्यकर्ताओं को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए हैं, उनका आपराधिक इतिहास रहा है और ऐसे लोगों का एसएसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।पर्यावरण के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी क्षेत्र की हवा और पानी खराब हो जाते हैं तो उन्हें कहीं बाहर से आयात नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि उद्योग या विकास के नाम पर अगर कोई उद्योगपति हवा और पानी को प्रदूषित करेगा तो उसका विरोध पूरी मजबूती से किया जाएगा।पंचायत के दौरान मौजूद कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में प्रशासन से निष्पक्ष जांच, आरोपों की स्पष्टता और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। पंचायत शांतिपूर्ण रही, लेकिन संदेश साफ था कि किसान और संगठन अब इन मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।















