मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत: 4.21 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण, करोड़ों रुपये का हुआ सेटलमेंट

मुजफ्फरनगर। जिला न्यायालय मुजफ्फरनगर में  राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जहां आपसी समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाता है। इसमें हार-जीत का प्रश्न नहीं होता, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान निकलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य वादकारियों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है, जिससे उनका समय और धन दोनों की बचत होती है। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऋण से जुड़े मामलों में ग्राहकों को अधिकतम छूट देकर प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम के दौरान प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय खलीकुज्जमा ने पारिवारिक विवादों को सुलह-समझौते के माध्यम से निपटाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पारिवारिक मामलों में समझौता ही सबसे बेहतर समाधान होता है, जिससे रिश्तों में कटुता कम होती है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। लोक अदालत में परिवार न्यायालयों द्वारा कुल 162 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया। लोक अदालत के नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कराने का एक बड़ा मंच है और त्वरित न्याय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था समाज के गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है, क्योंकि यहां बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के विवादों का समाधान संभव हो जाता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सिविल जज (सीडी) एवं सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 4,21,815 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण की पीठासीन अधिकारी आदेश नैन द्वारा 85 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों को 8 करोड़ 97 लाख 98 हजार रुपये का प्रतिकर प्रदान किया गया। इसके अलावा जनपद न्यायालय के विभिन्न न्यायालयों द्वारा 7,218 शमनीय फौजदारी मामलों और 50 दीवानी वादों का निस्तारण किया गया। शमनीय फौजदारी मामलों में 20 लाख 64 हजार 130 रुपये का अर्थदंड वसूला गया, जबकि दीवानी मामलों में 86 लाख 93 हजार 990 रुपये से अधिक की धनराशि उत्तराधिकार आदि के रूप में प्रदान की गई।

इसी प्रकार 138 एनआई एक्ट न्यायालय में 17 मामलों का निस्तारण करते हुए 26 लाख 46 हजार 876 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। राजस्व विभाग की ओर से जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में अधिकारियों ने 15,866 राजस्व मामलों का निस्तारण कर 1 करोड़ 62 लाख 12 हजार 820 रुपये का राजस्व वसूल किया। वहीं विभिन्न बैंकों द्वारा 585 ऋण मामलों का निस्तारण करते हुए लगभग 5 करोड़ 33 लाख 72 हजार रुपये की धनराशि का सेटलमेंट कराया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी, अधिवक्ता और वादकारी उपस्थित रहे। इस आयोजन को न्याय व्यवस्था को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आम जनता को शीघ्र न्याय मिल सके और लंबित मामलों का बोझ भी कम हो सके।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts