नेशनल हेराल्ड केस भारत की राजनीति में एक प्रमुख विवाद का केंद्र रहा है। यह मामला 2012 में तब सामने आया जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘यंग इंडियन’ नामक कंपनी के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। स्वामी का दावा था कि कांग्रेस पार्टी ने AJL को 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया था, जिसे बाद में यंग इंडियन ने मात्र 50 लाख रुपये में खरीद लिया, जिससे गांधी परिवार को AJL की 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर नियंत्रण मिल गया ।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में स्थित AJL और यंग इंडियन की कुल 751.9 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया ।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है और राहुल गांधी की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि ED के अधिकारियों ने राहुल गांधी से पूछताछ से जुड़ी जानकारियों को मीडिया में लीक किया, जो कि एक अपराध है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कानून मंत्री किरेन रिजीजू को कानूनी नोटिस भेजते हुए मांग की कि ED के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए ।
सुरजेवाला का यह भी कहना है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है और वह न्यायपालिका में पूरा विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल गांधी परिवार को निशाना बनाने का प्रयास है और इसके पीछे राजनीतिक दुर्भावना है।
इस प्रकार, नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस और ED के बीच कानूनी और राजनीतिक संघर्ष जारी है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ सामने आ रहे हैं।















