पश्चिम बंगाल के बजट में लक्ष्मी भंडार, आशा वर्कर्स से लेकर आंगनवाड़ी, सिविक वॉलंटियर्स सभी का भत्ता बढ़ा है. वहीं, बजट में इमामों और मोअज्जिनों का भत्ता नहीं बढ़ा है. इससे मुस्लिम समुदाय के लोग सीएम ममता बनर्जी से नाराज हैं. राज्य के अल्पसंख्यकों में ममता बनर्जी की सरकार को लेकर गुस्सा है.2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 27 फीसदी है, जो वर्तमान में करीब 34 फीसदी मानी जाती है. मुस्लिम ममता बनर्जी के बड़े वोटबैंक माने जाते हैं और इसी वोटबैंक के सहारे ममता बनर्जी चुनाव जीतती रही हैं, लेकिन चुनाव से पहले मुस्लिम नाराज हैं. इससे ममता बनर्जी की चुनौती बढ़ सकती है.बजट में आशा वर्कर्स का भत्ता 1000 रुपए बढ़ा है. उनका कहना है कि उन्हें इससे ज्यादा फायदा नहीं मिला है. मिड-डे मील वर्कर्स और पार्ट-टाइम टीचर्स भी खुश नहीं हैं. इस बार मोअज्जिनों भी गुस्से की लिस्ट में अपना नाम जोड़ रहे हैं.
भत्ता नहीं बढ़ने से इमाम-मुअज्जिन नाराज
तृणमूल कांग्रेस समर्थित इमाम ऑर्गनाइजेशन के जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के प्रेसिडेंट और जलपाईगुड़ी गरल बारी मस्जिद के इमाम जहीरुल इस्लाम ने भत्ता नहीं बढ़ने पर नाराजगी जताई है.जहीरुल इस्लाम का कहना है कि इस राज्य बजट में सभी का भत्ता कमोबेश बढ़ाया गया है, लेकिन सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया. जिस रेट से कीमतें बढ़ी हैं, 3000 रुपये महीने के भत्ते से कुछ नहीं होता है, अगर यह कम से कम 500 रुपये भी बढ़ जाता, तो मैं समझ जाता कि सरकार ने हमारे लिए कुछ नया सोचा है.जलपाईगुड़ी चरकडांगी जामा मस्जिद के मुअज्जम अब्दुल मजीद ने कहना है कि कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस छोटे से भत्ते से कुछ नहीं होता. हमारा भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए था. वैसे, पुजारियों की तरह मुअज्जनों को भी हर महीने 1500 रुपये भत्ता मिलता है.
मुस्लिमों में बढ़ी नाराजगी
दूसरी तरफ, इस्लामिक कम्युनिटी के लोगों के मन में गुस्सा भी बढ़ रहा है. अजीदा खातून ने कहा कि इमाम दिन भर में बहुत से लोगों को फायदा पहुंचाते हैं. उनका भत्ता क्यों नहीं बढ़ाया जाना चाहिए?अनवर हुसैन, फजरुल हक ने कहा कि सरकार अभी इमामों को हर महीने करीब 1000 से 1300 रुपये देती है, लेकिन इस रकम से कुछ नहीं होता. महीने का भत्ता कम से कम 6-7 हजार रुपये होना चाहिए.तृणमूल से जुड़े इमाम संगठन के नेता के चेहरे पर भत्ता न बढ़ने से निराशा की खबर के बाद जलपाईगुड़ी का सियासी पारा चढ़ गया है.
गरमाई बंगाल की सियासत
माकपा जिला सचिव समिति के सदस्य जमीनार अली का कहना है कि भले ही सभी का भत्ता कमोबेश बढ़ा दिया गया हो, लेकिन इमामों का भत्ता नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन यह भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए था. साथ ही, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य के बजट को देखकर ऐसा लगता है कि यह तृणमूल का चुनावी घोषणा पत्र है. भत्ते की समस्या, नौकरियों की कमी, हर चीज का असर इस साल के चुनावों पर पड़ेगा.बीजेपी जिला समिति के सदस्य पॉलेन घोष का कहना है कि बजट को लेकर समाज के कई वर्गों में गुस्सा बढ़ रहा है. इसका असर चुनावों पर जरूर पड़ेगा. इस बार तृणमूल सरकार का पतन निश्चित है.लेकिन, सत्तारूढ़ दल टीएमसी ने विपक्ष की बातों को खारिज कर दिया. तृणमूल डिस्ट्रिक्ट कमेटी के मेंबर पॉल हसन प्रधान का कहना है कि हालांकि कई लोगों के अलाउंस बढ़ गए हैं, लेकिन इमाम और मुअज्जन के अलाउंस नहीं बढ़े हैं. यह राज्य सरकार का मामला है. हमें उम्मीद है कि सरकार इस बारे में जरूर सोचेगी, लेकिन इससे वोट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि इमाम अलाउंस ममता ने ही शुरू किया था.















