पहले सिर और गर्दन के कैंसर को मुख्य रूप से तंबाकू और सिगरेट के सेवन से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब इसका स्वरूप तेजी से बदल रहा है। यशोदा मेडिसिटी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (हेड एंड नेक) विभाग के कंसल्टेंट डॉ. सुमंत बोलू के अनुसार, हाल के वर्षों में कम उम्र के ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जिन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया, फिर भी वे इस गंभीर बीमारी की चपेट में आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, पर्याप्त नींद न लेना और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कारण भी सिर और गर्दन के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर ने बताया कि युवा अक्सर यह मान लेते हैं कि कैंसर केवल अधिक उम्र में होने वाली बीमारी है, जिसके कारण वे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते जांच और उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।























































