नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सोमवार को विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया। यह उत्सव इस बार और भी खास रहा क्योंकि यह आरएसएस की स्थापना का शताब्दी समारोह भी है। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के कार्यकर्ताओं और देशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे।
भागवत ने अपने भाषण की शुरुआत गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि इतिहास में उनके अद्वितीय त्याग ने भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी सादगी और राष्ट्रभक्ति आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर चिंता जताई और कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हुए सतर्कता और एकजुटता पर जोर दिया।
भागवत ने मौजूदा समय में बढ़ती बिजली टैरिफ दरों और महंगाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आम जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। वहीं प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
भाषण के अंत में उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों से समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में और अधिक सक्रिय होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “देश की शक्ति जनता के सामूहिक प्रयास में है और जब हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे तो भारत विश्वगुरु बनेगा।”















