मालाखेड़ा में अभिभाषक संघ के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। बुधवार को संघ के सचिव देवेंद्र प्रधान और पूर्व अध्यक्ष कान सिंह नरूका की उपस्थिति में वकीलों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्य स्थगन के खिलाफ सामूहिक निर्णय लिया गया। इसके बाद उपखंड अधिकारी मालाखेड़ा को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि वे कार्य स्थगन के पक्ष में नहीं हैं और जनहित में अपने क्लाइंट्स के लिए नियमित रूप से कार्य करते रहेंगे। वकीलों ने यह भी कहा कि तहसीलदार के खिलाफ जो धरना प्रदर्शन चल रहा है, वह जनलोकहित में नहीं है, इसलिए वे उसका बहिष्कार करते हैं।
ज्ञापन देने वालों में सचिव देवेंद्र प्रधान, पूर्व अध्यक्ष कान सिंह नरूका, रिपुदमन सिंह नरूका, पीसी मीणा, जनक सिंह, नूरुद्दीन खान, रामनिवास जाट, निराकार शर्मा, रामभरोस चौधरी, विष्णु कुमार लहरपुरिया, मदन मीणा सहित एक दर्जन से अधिक अधिवक्ता शामिल रहे। उन्होंने सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट कार्यालय मालाखेड़ा सहित सभी न्यायालयों में नियमित रूप से कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
उल्लेखनीय है कि अभिभाषक संघ के अध्यक्ष फूल सिंह चौधरी ने बुधवार को दोनों कोर्ट में कार्य स्थगन का पत्र दिया था। वह पंजीयन अधिकारी और स्टांप बाबू के निलंबन की मांग को लेकर रेड राइटर और स्टांप विक्रेताओं के साथ धरने पर बैठे हैं। इस घटनाक्रम से एडवोकेट समुदाय दो गुटों में बंट गया है, जहां एक पक्ष कार्य स्थगन के समर्थन में है, वहीं दूसरा पक्ष न्यायालय में नियमित कार्य की मांग कर रहा है।















