मुंबई में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों को निर्देश दिया है कि वे मंगलवार दोपहर 3 बजे तक आजाद मैदान खाली कर दें। हाई कोर्ट में यह मामला उस समय पहुंचा जब राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि लंबे समय से आंदोलन की वजह से ट्रैफिक और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि आंदोलन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इससे जनता के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर बीते कई दिनों से बड़ी संख्या में लोग आजाद मैदान में डटे हुए हैं। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि वे अपनी मांगों पर सरकार से ठोस आश्वासन चाहते हैं। मराठा समाज लंबे समय से शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहा है। सरकार ने आरक्षण देने के लिए कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर विचार करने की बात कही है, लेकिन आंदोलनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने साफ किया कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना सभी को अनुमति है, लेकिन सार्वजनिक जगहों पर लंबे समय तक धरना देकर आम लोगों को असुविधा पहुंचाना सही नहीं है। अदालत ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिया है कि यदि तय समय यानी 3 बजे तक आंदोलनकारी मैदान खाली नहीं करते, तो आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि मराठा आंदोलनकारी कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए शांतिपूर्वक आजाद मैदान छोड़ते हैं या नहीं। वहीं, राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता की कोशिशें भी जारी हैं ताकि समाधान निकालकर स्थिति को और गंभीर होने से रोका जा सके।















