मालाखेड़ा शिविर में दिव्यांगों और अनाथ बच्चों की उपेक्षा, SDM के हस्तक्षेप से सुलझे मामले

मालाखेड़ा। पंचायत समिति मुख्यालय पर सामाजिक अधिकारिता विभाग की ओर से दिव्यांग पहचान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें कई खामियां सामने आईं। यूडीआईडी कार्ड होने के बावजूद चिकित्सकीय टीम ने दिव्यांगों को उपकरण की सिफारिश देने से इनकार कर दिया। वहीं, अनाथ बच्चे पालनहार योजना की राशि के लिए वर्षों से भटकते नजर आए।

लिली गांव के मामचंद ने बताया कि उसके पास 81 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र है, फिर भी डॉक्टर उसकी विकलांगता के आधार पर स्कूटी या अन्य उपकरण की सिफारिश नहीं कर रहे। इसी दौरान शिविर में अचानक पहुंचे उपखंड अधिकारी ने हालात का जायजा लिया और तत्काल संबंधित विभागों को बुलाकर समस्याएं सुनीं।

उन्होंने मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी पहचान कार्ड के आधार पर उपकरणों की सिफारिश न करने पर नाराजगी जताई। खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी लोकेश मीणा ने बताया कि यूडीआईडी कार्ड यदि मेडिकल बोर्ड से जारी है, तो उसी आधार पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

शिविर में शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे पालनहार योजना के लाभार्थी सागर और उमेश जैसे अनाथ बच्चों को परेशानी हुई। दोनों बच्चों ने अपनी बात उपखंड अधिकारी के सामने रखी। इसके बाद तीन साल से भटक रहे इन बच्चों को योजना की राशि मिलने का रास्ता साफ हो पाया।

मुख्यमंत्री बजट घोषणा के अंतर्गत लगे इस शिविर में चिकित्सा विभाग की ओर से 62 दिव्यांगों का पंजीकरण किया गया, रोडवेज द्वारा 7 पास बनाने के आवेदन लिए गए और 30 ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र भरे गए। समाज कल्याण विभाग ने 42 दिव्यांग प्रमाण पत्रों का पंजीकरण किया।

उपखंड अधिकारी नवज्योति कवरिया ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप दिव्यांगजनों को उनके अधिकार मिलें, इसके लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग की अनुपस्थिति पर संबंधित विभाग को पत्र भेजा जाएगा। शिविर में डॉक्टर ज्ञानेंद्र चौहान, प्रियंका, अरुण मित्तल, रवीना तायल और कैलाश चंद सैनी सहित अन्य विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे।

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