मुजफ्फरनगर में उदारता, समानता और सहयोग के प्रतीक महाराजा अग्रसेन की जयंती बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। नगर के अबूपुरा स्थित कदीम अग्रवाल सभा में हवन-पूजन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें वैश्य समाज के गणमान्य लोग और पदाधिकारी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः हवन-पूजन से हुई, जिसमें उपस्थित लोगों ने समाज और राष्ट्र की उन्नति एवं समृद्धि की कामना की।सभा के पदाधिकारियों और अतिथियों ने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। नगर पालिका अध्यक्ष ने महाराजा अग्रसेन को लोक मंगल और कल्याण का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित “एक ईंट, एक रुपया” का सिद्धांत आज भी सामाजिक न्याय, आत्मनिर्भरता और सहयोग की अनूठी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को अपनाकर समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को कम किया जा सकता है।इस वर्ष महाराजा अग्रसेन जयंती नवरात्र के प्रथम दिन पड़ने के कारण उत्सव का महत्व और बढ़ गया। वैश्य समाज के लोगों ने इसे विशेष पर्व के रूप में मनाते हुए नगर और प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम में कदीम अग्रवाल सभा के अध्यक्ष सौरभ स्वरूप उर्फ बंटी, संरक्षक मोहन तायल, महामंत्री मयंक बंसल, अनिल तायल, शरद गुप्ता, जनार्दन स्वरूप, पवन बंसल, शलभ गुप्ता एडवोकेट, कृष्णगोपाल मित्तल, तरूण मित्तल, दीपक मित्तल सर्राफ, डॉ. मनोज काबरा, हिमांशु गोयल सहित समाज के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने महाराजा अग्रसेन के जीवन और उनके द्वारा स्थापित आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को याद किया। हवन-पूजन और सामाजिक समर्पण के इस आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों में समाज के प्रति एकता और सहयोग की भावना को मजबूत किया। समारोह का उद्देश्य न केवल महाराजा अग्रसेन की जयंती का उत्सव मनाना था, बल्कि समाज में भाईचारे, समानता और नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करना भी था।इस प्रकार, नगर में महाराजा अग्रसेन जयंती का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। समाज के लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अग्रसेन के आदर्शों और सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर समाज निर्माण में योगदान देंगे। कार्यक्रम ने समाज में आपसी सहयोग, सामाजिक न्याय और भाईचारे की भावना को प्रबल करने का संदेश दिया, जिससे नगरवासियों में उत्साह और आस्था की भावना और भी बढ़ गई।















