लोकसभा ने वक्फ संशोधन बिल पर JPC की समय सीमा बढ़ाई

लोकसभा वक्फ संशोधन विधेयक 2023 के लिए संयुक्त समिति (JPC) का समय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव बीजेपी नेता जगदंबिका पाल द्वारा प्रस्तुत किया गया, और इसके खिलाफ विपक्षी दलों ने हंगामा किया। विपक्षी सांसदों का कहना था कि वे सदन में अन्य मुद्दों, जैसे संभल हिंसा और अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी से जुड़े आरोपों पर चर्चा करना चाहते थे।JPC की बैठक के दौरान कई सदस्यों ने इस प्रस्ताव को समर्थन दिया, यह कहते हुए कि कई स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात और बातचीत अभी बाकी है। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने इस समय विस्तार की मांग की थी, लेकिन जब प्रस्ताव आया, तो कांग्रेस ने फिर भी विरोध किया। रिजिजू ने इस हंगामे की निंदा की।

समिति को दिया गया था 29 नवंबर तक का समय

8 अगस्त को गठित समिति को शुरू में 29 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया था, लेकिन वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी तकरार देखने को मिली, जिसकी वजह से बहस पूरी नहीं हो पाई और सदस्यों ने अधिक समय मांगा. इस सप्ताह समिति के विपक्षी सदस्यों ने बुधवार को एक बैठक के दौरान वॉकआउट कर दिया, जिसमें बीजेपी नेता जगदंबिका पाल पर समय से पहले यह घोषणा करने का आरोप लगाया गया कि मसौदा रिपोर्ट तैयार है.

विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर लगाए ये आरोप

विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि समिति का कार्यकाल बढ़ाने के बारे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आश्वासन को नजरअंदाज किया गया. वॉकआउट के बाद बीजेपी नेता पाल और पार्टी सदस्यों ने विपक्ष से संपर्क किया और समिति की समयसीमा बढ़ाने की मांग पर सहमति जताई. पाल ने स्पष्ट किया कि मसौदा रिपोर्ट चर्चा के लिए तैयार है और स्टेकहोल्डर के साथ परामर्श पूरा हो चुका है. हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि प्रक्रिया में पर्याप्त विचार-विमर्श का अभाव है. वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है. उनका दावा है कि ये मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य वक्फ बोर्डों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

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