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शामली। थानाभवन। नगर के आश्रम पंचतीर्थी में आयोजित कथा श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यस ने श्रीमद् भागवत के महत्व पर प्रकाश डाला।थानाभवन के आश्रम पंचतीर्थी में महन्त स्वामी रामदेव जी महाराज के सानिध्य में आयोजित में श्रीमद् भागवत की सप्ताह के दौरान कथा व्यास आचार्य त्रिपुरारी जी महाराज ने श्री मद भागवत के महत्व का वर्णन करते हुए कथा के प्रथम दिन कहा ईश्वर सच्चिदानंद मय है सत्य चित् एवं आनंदमय सत्य का कोई दूसरा रूप नहीं है । सत्य अपने आप में सबसे बड़ा प्रमाण है सत्य से बड़ा कोई प्रमाण नहीं और परमात्मा स्वयं सत्य मय है वह स्वयं ही चित मय है वह स्वयं ही आनंद मय है कथा का वर्णन करते हुए वह कहते हैं की धुंधकारी जो की कुसंस्कारों में पड़कर महापापी बन गया था वेश्यागामी करते हुए मदिरापान करता था जिसने पाप कर्म में लिप्त होकर के अपनी मां की मृत्यु का कारण भी बना। इसी प्रसंग में उन्होंने कहा कि अपनी संतान को धन दो या ना दो लेकिन उन्हें संस्कारवान अवश्य बनाओ। भागवत कथा श्रवण करने से प्रेत यूनि से धुंधकारी का भी उद्धार हुआ। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान वैराग्य का भी महर्षियों द्वारा नारद जी के माध्यम से उद्धार हुआ। कथा के उपरांत आशीर्वचन देते हुए महन्त स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि कथा को श्रवण करने हेतु आने से एक-एक पग एक-एक अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।















