“थ्रेडिंग कराने से पहले जानें ये ज़रूरी बातें, लापरवाही से बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का खतरा”

आजकल थ्रेडिंग महिलाओं के बीच एक सामान्य ब्यूटी ट्रीटमेंट बन चुका है। भौंहों को आकार देने और चेहरे के अनचाहे बाल हटाने के लिए थ्रेडिंग सबसे आसान और सस्ती विधि मानी जाती है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह प्रक्रिया साफ-सफाई और सावधानी के बिना की जाए, तो यह गंभीर त्वचा रोगों और संक्रमण का कारण बन सकती है।

त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, थ्रेडिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाला धागा अगर स्टरलाइज न किया गया हो या उसे बार-बार अलग-अलग ग्राहकों पर इस्तेमाल किया जाए, तो इससे बैक्टीरियल, फंगल और वायरल इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। धागा त्वचा के बहुत पास घर्षण पैदा करता है, जिससे छोटे-छोटे कट या खरोंच बन सकते हैं। इन खुले पोर्स और माइक्रो कट्स के जरिए बैक्टीरिया आसानी से त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं। इससे पिंपल्स, एलर्जी, स्किन रैशेज़, फॉलिक्युलाइटिस (बालों की जड़ों में सूजन) और यहां तक कि हर्पीस जैसे वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि थ्रेडिंग से पहले त्वचा और इस्तेमाल होने वाले धागे दोनों को सैनिटाइज करना बेहद जरूरी है। अगर ब्यूटी पार्लर में यह प्रक्रिया साफ-सफाई के मानकों के अनुसार नहीं की जाती, तो ग्राहक की त्वचा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। धागा हमेशा नया होना चाहिए और इस्तेमाल से पहले हाथ अच्छी तरह धोने चाहिए। थ्रेडिंग के बाद भी त्वचा पर एंटीसेप्टिक या ऐलोवेरा जेल लगाना जरूरी है, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।

कुछ मामलों में देखा गया है कि असावधानी के चलते थ्रेडिंग के बाद स्किन पर लालिमा, सूजन और पस बनना शुरू हो जाता है। यदि इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ किया जाए, तो यह गंभीर त्वचा रोग में बदल सकता है, जिसके लिए लंबे समय तक दवा लेनी पड़ सकती है। इसलिए त्वचा रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि थ्रेडिंग के लिए हमेशा प्रशिक्षित और स्वच्छता का ध्यान रखने वाले प्रोफेशनल का ही चुनाव करें।

थ्रेडिंग से जुड़ी यह सावधानियां अपनाकर न केवल आप अपनी सुंदरता बरकरार रख सकती हैं, बल्कि गंभीर बीमारियों से भी बच सकती हैं। आखिरकार, थोड़ी सी जागरूकता आपकी त्वचा की सेहत और सुंदरता दोनों की सुरक्षा कर सकती है।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts