मुजफ्फरनगर। नई मंडी स्थित मेहता क्लब भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उल्लास से सराबोर नज़र आया। भावलिंगी संत श्रमणाचार्य 108 विमर्श सागर महामुनिराज ससंघ की प्रेरणा और पावन सानिध्य में आयोजित कल्पद्रुम महा मण्डल विधान में नगर के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ अर्जित किया। सुबह से ही पूरा परिसर मंत्रोच्चार, स्तोत्र पाठ और भक्तिमय अनुष्ठानों की गूंज से आच्छादित रहा, जिसने वातावरण को पूर्णतः पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
विधान के दौरान संतों ने जीवन में संयम, करुणा, अहिंसा और आत्मशुद्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठान मन की शांति बढ़ाते हैं और व्यक्ति को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के लोगों से नैतिक मूल्यों को अपनाने, सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने और आंतरिक शांति की दिशा में प्रयासरत रहने का संदेश दिया। संत विमर्श सागर महामुनिराज के प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया और आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में नगरपालिका परिषद् की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और सभासद सीमा जैन ने अन्य श्रद्धालुओं के साथ उपस्थित होकर मुनिराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। मीनाक्षी स्वरूप ने इस विशाल धार्मिक आयोजन को नगर के लिए शुभ और कल्याणकारी बताते हुए कहा कि ऐसे अनुष्ठान समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करते हैं और लोगों को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के लिए शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की। उनके साथ विकल्प जैन, सीए शीतल जैन, पंकज जैन, अमित जैन एडवोकेट, जितेन्द्र उर्फ टोनी जैन, अशोक जैन, सचिन जैन, विपिन जैन, विकास कुमार जैन, पंकज कुमार, अनिल जैन, त्रिशला जैन, संगीता जैन, अर्जुन जैन और पिंकी जैन सहित दिगम्बर जैन साधु सेवा समिति के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
मेहता क्लब परिसर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों से गूंजता रहा और दिन भर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। समिति पदाधिकारियों ने अतिथियों एवं साधकों का पूरे उत्साह के साथ स्वागत-सत्कार किया। आयोजन समिति के अनुसार इस धार्मिक विधान का विधिवत समापन 30 नवंबर को भव्य रूप में किया जाएगा। समापन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात तथा अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
पूरे आयोजन ने नगर में एक विशेष आध्यात्मिक माहौल निर्मित किया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का गहरा अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतिरूप बना, बल्कि समाज में सामूहिकता और सद्भाव की भावना को भी प्रबल करता दिखा।
















