इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लाल बहादुर शास्त्री पूर्व माध्यमिक विद्यालय भटकल मऊ और सुभाष जूनियर हाईस्कूल ठाकुर गून मऊ में पांच साल से कार्यरत लिपिकों का वेतन रोकने को औचित्यहीन करार दिया है और वेतन भुगतान के अंतरिम आदेश को स्थायी करते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने वंशराज यादव व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक यादव व आरएन यादव और सरकारी वकील को सुनकर दिया है। आजमगढ़ के सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक ने 24 मई 2017 के आदेश से छह नवंबर 2015 को की गई सभी नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं। कहा कि 15 मार्च 2012 के शासनादेश से नियुक्तियों पर बैन लगा था। अधिवक्ता द्वय का तर्क था कि बाद के शासनादेश से 800 हेडमास्टर, 1444 सहायक अध्यापकों व 528 लिपिकों की नियुक्ति की छूट दी गई थी। सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक ने आदेश करते समय इस शासनादेश की अनदेखी की है। इस पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश से जवाबी हलफनामा मांगते हुए बेसिक शिक्षा निदेशक इलाहाबाद व सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक आजमगढ़ के आदेशों पर रोक लगा दी। याची कार्यरत हैं और वेतन पा रहे हैं। सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर कहा गया कि नियुक्ति ही गलत थी इसलिए वेतन रोकना सही था। यह भी माना कि याची पांच साल से कार्यरत हैं।
कोर्ट ने कहा कि याचियों पर यह आरोप नहीं है कि वे पद के योग्य नहीं थे या चयन प्रक्रिया सही नहीं थी। केवल बैन लगे होने के आधार पर नियुक्ति निरस्त की गई थी। कोर्ट ने अंतरिम आदेश को अंतिम आदेश में परिवर्तित कर दिया। कहा कि यदि कोई कानूनी त्रुटि हो तो सरकार नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है।















