मुजफ्फरनगर। जिले में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सिटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजनांतर्गत बुक किए गए कृषि यंत्रों के चयन के लिए ई-लॉटरी प्रक्रिया का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के संबंध में उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार सिरोही ने सभी किसानों को सूचित करते हुए बताया कि जिन कृषकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि उपकरणों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराई है, वे निर्धारित तिथि पर अनिवार्य रूप से उपस्थित हों।
सूचना के अनुसार ई-लॉटरी का आयोजन 21 नवंबर 2025 को अपराह्न 12 बजे से विकास भवन के सभागार में किया जाएगा। यह लॉटरी उन सभी किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जिन्होंने समय पर ऑनलाइन टोकन बुकिंग कराते हुए विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए आवेदन किया था। विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि चयन प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और ऑनलाइन माध्यम से होगी, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात की संभावना न रहे।इस ई-लॉटरी के माध्यम से जिन यंत्रों का चयन होना है उनमें कृषि कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग होने वाले उपकरण शामिल हैं। इनमें रोटावेटर, हैरो, टिलर, लेज़र लैंड लेवलर, कल्टीवेटर, पावर टिलर, सुपर सीडर, एमबी प्लाउ, रीपर कम्बाइंडर, कम्बाइन हार्वेस्टर विद सुपर एसएमएस, फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसे आधुनिक उपकरण शामिल हैं। ये सभी यंत्र आधुनिक कृषि पद्धति में अत्यंत उपयोगी हैं और इन पर मिलने वाला अनुदान किसानों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण राहत प्रदान करता है।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों ने अपने पसंदीदा यंत्र के लिए ऑनलाइन टोकन बुकिंग कराई है, वे उसी मोबाइल नंबर के साथ ई-लॉटरी प्रक्रिया में सम्मिलित हों जिससे बुकिंग की गई थी; क्योंकि चयन से संबंधित सभी मोबाइल सत्यापन की प्रक्रिया उसी नंबर के आधार पर पूरी की जाएगी। किसानों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग की ओर से लगातार जानकारी प्रसारित की जा रही है ताकि किसी भी आवेदक को चयन प्रक्रिया से वंचित न रहना पड़े।
इस योजना का उद्देश्य न केवल किसानों को आधुनिक मशीनों से जोड़ना है, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन को प्रभावी बनाना भी है। आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से खेतों में पराली प्रबंधन आसान होता है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। सरकार और कृषि विभाग लगातार प्रयासरत हैं कि अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीक अपनाएं और उनकी लागत में कमी के साथ उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि और समय पर विकास भवन, सभागार में पहुंचकर ई-लॉटरी प्रक्रिया में प्रतिभाग जरूर करें, ताकि कृषि यंत्रों के अनुदान का लाभ समय से प्राप्त किया जा सके।















