मुजफ्फरनगर। महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान के अंतर्गत मंगलवार को अपर जिलाधिकारी वित्त गजेन्द्र कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ ने मुजफ्फरनगर जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का गहनता से परीक्षण किया। उन्होंने महिला बंदियों के रहने की स्थिति, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया तथा प्रत्यक्ष रूप से महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम पूछी।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने महिला बंदियों के लिए चल रहे शिक्षण, प्रशिक्षण और कौशल विकास से संबंधित कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया। महिला बंदियों द्वारा सिलाई केंद्र में तैयार किए जा रहे बैग एवं अन्य वस्तुओं को देखकर अधिकारियों ने उनकी मेहनत और लगन की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हैं, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना भी विकसित करते हैं।
अधिकारियों ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि महिला बंदियों को शिक्षा, स्वावलंबन और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित किया जाए। साथ ही महिला बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र, योग कार्यक्रम एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि वे भावनात्मक रूप से मजबूत बन सकें और समाज में पुनः सम्मानपूर्वक अपनी जगह बना सकें। निरीक्षण के दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि कारागार में उपलब्ध चिकित्सा सेवाएं पर्याप्त हों और स्वच्छता का उच्च स्तर बनाए रखा जाए।
अपर जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक अपराध ने इस बात पर भी जोर दिया कि महिला बंदियों के कौशल विकास प्रशिक्षण और शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि वे रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़ी होकर जीवन को नई दिशा दे सकें। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति का मूल उद्देश्य महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना है, और इस दिशा में जेल प्रशासन का यह प्रयास सराहनीय है।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक अभिषेक चौधरी, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर, जेलर नीरज श्रीवास्तव, महिला थाना प्रभारी संगीता डागर सहित पुलिस एवं प्रशासन के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यह संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल समाज में रहने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जेलों में निरुद्ध महिलाओं के जीवन में सुधार लाना भी उतना ही आवश्यक है। यह पहल न केवल उनके पुनर्वास की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि प्रत्येक महिला को अपने जीवन को पुनः सशक्त और सम्मानजनक तरीके से जीने का अवसर मिलना चाहिए।
















