राजगढ़ उपखंड में तालुका विधिक सेवा समिति राजगढ़ की सचिव भाग्यश्री मीणा द्वारा ग्रामीण व आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के निर्देशानुसार यह शिविर ग्राम पंचायत अलेई में नरेगा कार्य स्थल पर लगाया गया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रमिकों व ग्रामीणों ने भाग लिया। शिविर का उद्देश्य आदिवासियों को उनके कानूनी अधिकारों, नालसा योजनाओं तथा न्याय तक सरल पहुंच के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।
शिविर के दौरान तालुका विधिक सेवा समिति की सचिव भाग्यश्री मीणा, पैरा लीगल वॉलंटियर शिवकांत और सुबेन्द्र कुमार सैनी ने उपस्थित लोगों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा विशेष रूप से जनजातीय समुदायों, कमजोर वर्गों, विमुक्त एवं घूमंतू जनजातियों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और न्याय उपलब्ध करवाने के लिए कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। नालसा की इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई भी व्यक्ति आर्थिक या सामाजिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रहे।
शिविर में आदिवासी समुदाय के लोगों को यह भी बताया गया कि नालसा स्कीम कमजोर आदिवासियों के लिए न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस योजना के तहत कानूनी जागरूकता बढ़ाने, आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें न्याय प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जाता है। साथ ही उपस्थित ग्रामीणों को एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई, जिसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों के संरक्षण, सुरक्षा और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शामिल है।
शिविर में यह स्पष्ट रूप से बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों, महिलाओं, बच्चों, विकलांग जनों, आदिवासियों, मानव तस्करी से पीड़ित लोगों तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता न केवल न्यायालय संबंधी प्रक्रियाओं में सहयोग देती है, बल्कि पीड़ितों के अधिकारों व उनके कल्याण को सुरक्षित भी करती है।
अंत में, आमजन को नालसा की सभी प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए यह बताया गया कि जागरूकता ही न्याय की पहली सीढ़ी है। जब समाज का कमजोर और हाशिए पर बसे वर्ग कानूनी रूप से सक्षम होगा, तभी न्याय प्रणाली का उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा। इस प्रकार आयोजित यह जागरूकता शिविर ग्रामीणों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जिसमें मौजूद लोगों ने विधिक जानकारी को समझते हुए इसे अपने जीवन में उपयोगी बताया।















