अमेरिका में गूंजी भारतीय बेटी की जीत: हैदराबादी मूल की गजाला हाशमी बनीं पहली मुस्लिम महिला लेफ्टिनेंट गवर्नर

न्यूयॉर्क में भारतवंशी जोहरान ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद अब वर्जीनिया से एक और ऐतिहासिक खबर आई है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार गजाला हाशमी ने वर्जीनिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर रेस में जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। CNN के मुताबिक, हाशमी अब अमेरिका के किसी भी राज्य में चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं। हैदराबाद, भारत में जन्मी गजाला हाशमी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को कड़े मुकाबले में हराकर 52.4% वोटों के साथ जीत हासिल की।
यह जीत न केवल डेमोक्रेट्स के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, बल्कि इसने यह भी साबित किया है कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं का प्रभाव और भागीदारी लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जोहरान ममदानी के बाद अब गजाला हाशमी की इस ऐतिहासिक जीत से एक और राजनीतिक झटका लगा है।

पहली मुस्लिम महिला लेफ्टिनेंट गवर्नर

गजाला हाशमी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को हराया है, जो राज्य के पहले खुले तौर पर समलैंगिक उम्मीदवार भी थे. हाशमी अब वर्जीनिया सीनेट की अध्यक्षता करेंगी और जरूरत पड़ने पर सदन में बराबरी की स्थिति होने पर निर्णायक वोट डाल सकेंगी. उनकी जीत का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि हाशमी की सीट खाली होने के बाद डेमोक्रेट्स को सीनेट में सिर्फ 20-19 का मामूली बहुमत मिलेगा.

हाशमी ने जून में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी में पांच उम्मीदवारों को हराकर महज 28% वोटों से नामांकन हासिल किया था. इसके बाद उन्होंने डेमोक्रेटिक टिकट पर गवर्नर पद की उम्मीदवार एबिगेल स्पैनबर्गर और अटॉर्नी जनरल प्रत्याशी जे जोन्स के साथ मिलकर प्रचार किया.

2019 में भी रचा था इतिहास

हाशमी का नाम पहले भी सुर्खियों में रह चुका है. 2019 में उन्होंने राज्य सीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रचा था. उस वक्त वे वर्जीनिया की पहली मुस्लिम और पहली भारतीय मूल की सीनेटर बनी थीं. उन्होंने अपने पहले अभियान में ट्रंप प्रशासन के मुस्लिम बैन का खुलकर विरोध किया था और उसी मुद्दे को उन्होंने अपने नए चुनाव अभियान की नींव बनाया.

भारत से क्या कनेक्शन है?

गजाला हाशमी का नाता सीधे भारत के हैदराबाद से है. उनका जन्म 5 जुलाई 1964 को यहीं हैदराबाद में हुआ था. जब वो सिर्फ चार साल की थी तब अपनी मां और बड़े भाई के साथ अमेरिका चली गईं. उस समय उनके पिता पहले से ही जॉर्जिया में थे, जहां वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी पूरी कर रहे थे और विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू कर चुके थे. अमेरिका पहुंचने के बाद गजाला ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया. उन्होंने जॉर्जिया साउदर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ बीए की डिग्री हासिल की और फिर अटलांटा की एमोरी यूनिवर्सिटी से अमेरिकन लिटरेचर में पीएचडी की.

ट्रंप प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

अपने चुनावी कैंपेन में गजाला हाशमी ने लगातार ट्रंप प्रशासन की नीतियों और रिपब्लिकन शसन के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने शिक्षा, महिला अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को अपने एजेंडे का मुख्य हिस्सा बनाया. दूसरी ओर, उनके प्रतिद्वंद्वी जॉन रीड ने पैरेंट्स राइट्स और ट्रांसजेंडर छात्रों से जुड़े मुद्दों को चुनावी हथियार बनाया. उन्होंने ट्रंप समर्थक के तौर पर प्रचार किया, लेकिन उन्हें ट्रंप का औपचारिक समर्थन नहीं मिला.

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