कृषि उत्पाद बढ़ाने के लिए किसानों को दी जाएगी प्रोत्साहन राशि

बांदा। आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति 2019 (संशोधित 2024) के तहत मंडल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किसानों, एफपीओ, निर्यातकों और अन्य हितधारकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल के क्लस्टर के लिए 10 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी, जबकि क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रति 50 हेक्टेयर के हिसाब से 6 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। निर्यात उन्मुख क्लस्टर के पास स्थापित नई प्रसंस्करण इकाइयों को कुल प्रसंस्कृत उत्पाद का 40 प्रतिशत निर्यात करने पर टर्नओवर का 10 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख रुपये तक की सहायता पांच वर्षों तक दी जाएगी।

कृषि उत्पादों और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात पर परिवहन अनुदान के रूप में वास्तविक भाड़े का 25 प्रतिशत या अधिकतम 20 लाख रुपये प्रति वर्ष प्रति निर्यातक दिया जाएगा। कृषि निर्यात और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन में डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने पर छात्रों की वार्षिक फीस का 50 प्रतिशत या 50,000 रुपये प्रति छात्र की सहायता मिलेगी। इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले शासकीय संस्थानों को 50 लाख रुपये की एकमुश्त अनुदान राशि भी दी जाएगी।

निर्यात क्लस्टर में अच्छी कृषि पद्धतियों और प्रमाणीकरण पर कुल खर्च का 50 प्रतिशत या अधिकतम 1.50 लाख रुपये प्रति वर्ष की प्रतिपूर्ति की जाएगी। जैविक, प्राकृतिक एवं समकक्ष प्रमाणीकरण पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष की सहायता मिलेगी। कृषि और प्रसंस्कृत उत्पादों के नमूनों के एमआरएल मानकों के परीक्षण हेतु कुल खर्च का 50 प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख रुपये प्रति वर्ष की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है।

कृषि निर्यात में प्रयुक्त विशिष्ट और गैर-विशिष्ट कृषि उपज को किसानों और एफपीओ से सीधे खरीदने पर मंडी शुल्क, प्रयोक्ता प्रभार और विकास सेस में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। आढ़तियों के माध्यम से खरीद करने पर मंडी शुल्क और प्रयोक्ता प्रभार में पूरी छूट मिलेगी, लेकिन विकास सेस देय होगा।

बैठक में जनपदों के क्लस्टर सुविधा इकाइयों के सचिवों ने अपनी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। एपीडा के सहायक प्रबंधक ने कृषि निर्यात के लिए आवश्यक लाइसेंस और उत्पाद प्रमाणीकरण की जानकारी दी। मीट निर्यात हेतु सतत एकीकृत आपूर्ति शृंखला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

बांदा कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को छात्रवृत्ति दिलाने और कृषि निर्यात एवं पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन में डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति से पत्राचार करने और वार्ता करने का निर्णय लिया गया। हमीरपुर जिले में गन्ना विभाग की स्थापना के लिए भी मांग उठाई गई, जिसे लेकर आवश्यक प्रयास करने का आश्वासन दिया गया।

धनौरी की लाल मिर्च के लिए जीआई टैगिंग कराने और महोबा के देसावरी पान के निर्यात के लिए क्लस्टर गठन पर भी चर्चा की गई। महोबा के पान किसानों ने क्लस्टर क्षेत्रफल को 50 हेक्टेयर से कम करने का सुझाव दिया, जिस पर संबंधित विभागों को उचित प्रस्ताव तैयार कर राज्य स्तरीय समिति को भेजने के निर्देश दिए गए।

बैठक में कृषि विभाग, एपीडा, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, पशुपालन विभाग, नाबार्ड, उद्योग विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का समापन संयुक्त कृषि निदेशक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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