मुजफ्फरनगर में हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, इंस्टाग्राम के जरिए होती थी सप्लाई, पांच आरोपी गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर जिले की थाना सिविल लाइन और एसओजी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध हथियारों की तस्करी में लिप्त एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो मेरठ जनपद के निवासी हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध असलहा बरामद किया है, जिसमें अत्याधुनिक हथियार भी शामिल हैं।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में कुल 15 हथियार बरामद किए गए हैं। इनमें तीन 9एमएम पिस्टल, आठ 315 बोर के तमंचे, एक 12 बोर का तमंचा और दो 12 बोर की मस्कट शामिल हैं। पुलिस की मानें तो यह गिरोह सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम के माध्यम से अपने ग्राहकों से संपर्क करता था और हथियारों की डिलीवरी सुनिश्चित करता था।पकड़े गए आरोपियों में से एक आईआईएमटी मेरठ का छात्र है, जबकि अन्य सदस्य मजदूरी का कार्य करते हैं। यह गिरोह लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय था और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवा ग्राहकों को टारगेट करता था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे हथियार अलग-अलग स्रोतों से खरीदते थे और फिर उसे आगे बेचते थे।पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम सुराग भी मिले हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों में मुजफ्फरनगर के कुछ कुख्यात गैंगस्टरों के संपर्क भी पाए गए हैं, जो पहले भी हथियार तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में जेल जा चुके हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और हथियार खरीदने वालों की भी पहचान करने में जुटी है।जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हथियार खरीदने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर एक विस्तृत जांच जारी है और अन्य जिलों की पुलिस से भी सहयोग लिया जा रहा है ताकि इस नेटवर्क की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके।इस उल्लेखनीय कार्रवाई में शामिल टीम को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध हथियारों की तस्करी और अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।यह मामला न केवल कानून व्यवस्था की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती आपराधिक गतिविधियों पर भी सवाल खड़े करता है। पुलिस अब सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को और सख्त करने की योजना बना रही है ताकि ऐसे आपराधिक तरीकों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।

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