बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में एक बयान में कहा कि “यदि कानून सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिए।” उन्होंने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न मुद्दों पर दिए गए फैसलों को लेकर की। दुबे ने यह तर्क दिया कि संसद का प्रमुख कार्य कानून बनाना है, और यदि न्यायपालिका इसे करने लगे तो लोकतंत्र की बुनियादी संरचना पर सवाल उठ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को कानून बनाने की जिम्मेदारी दी गई है और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए। उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों के संदर्भ में आया, जिनमें कई बार विधायी मामलों पर हस्तक्षेप किया गया था। यह बयान एक तरह से न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्ति के संतुलन पर बहस को जन्म देता है।















