लोकसभा में बीते दिन भारी हंगामे के बाद सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया है। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश ने सुरक्षा और मर्यादा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए। हंगामे की वजह से प्रधानमंत्री का प्रस्तावित भाषण भी नहीं हो सका। इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में गंभीर चिंता जताई है।स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि देश ने स्वयं देखा कि सदन में क्या हालात बने। उन्होंने बताया कि कुछ सांसदों ने नियमों और परंपराओं को ताक पर रखकर प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ने का प्रयास किया। स्पीकर के अनुसार, उन्हें पहले ही सूचना मिल गई थी कि कोई अप्रिय घटना घट सकती है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे उस दिन सदन में न आएं।ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आते तो कोई भी अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो सकती थी, जो लोकतंत्र की गरिमा के लिए ठीक नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां सभी सांसदों को मर्यादा, नियम और अनुशासन का पालन करना चाहिए। स्पीकर ने सदन को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस सांसदों के बारे में मेरे पास पुख्ता जानकारी आई
स्पीकर ने कहा, विपक्ष के कुछ सदस्यों ने जिस तरह का व्यवहार किया, वैसा आज तक कभी नहीं हुआ. यह घटना काले धब्बे की तरह है. मेरे पास पुख्ता जानकारी आई कि कांग्रेस के कई सदस्य नेता सदन के आसन पर पहुंचकर अप्रत्याशित घटना को अंजाम दे सकते थे. अगर ऐसा होता तो यह बहुत अप्रिय दृश्य देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार कर देता
कौन-कौन पहुंच गया था पीएम की कुर्सी के पास?
इसके साथ ही उन महिला सांसदों के नाम भी सामने आए हैं जो पीएम की कुर्सी तक पहुंच गई थीं. इनमें आर. सुधा, ज्योतिमणि, वर्षा गायकवाड़, गेनी बेन ठाकोर, के. काव्या और शोभा बच्छाव शामिल हैं. अब इस मामले को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रतिक्रिया दी है.
बेंच के सामने 3 महिलाएं खड़ी थीं, यह क्या बकवास है?
स्पीकर के बयान के बाद प्रियंका ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पीकर ओम बिरला के पीछे छिप रहे हैं. कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि बेंच के सामने तीन महिलाएं खड़ी थीं. यह क्या बकवास है? कोई चर्चा नहीं हो रही है क्योंकि सरकार चर्चा नहीं चाहती है.















