अब मिर्गी, ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल कॉर्ड और स्ट्रोक के सूक्ष्म कारणों की पहचान आसान होगी। एम्स इन बीमारियों की सटीक पकड़ के लिए 7 टेस्ला छवि की दिशा में आगे बढ़ रहा है। फिलहाल एम्स में 3 टेस्ला छवि तक की क्षमता है।
इनकी मदद से जांच करने के बाद भी अति सूक्ष्म कारण छिप जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क में होने वाले सूक्ष्म कारणों की पहचान में 7 टेस्ला एमआरआई स्कैनर मशीन काफी मददगार साबित हो सकती है।
एम्स में अभी 1.5 से तीन टेस्ला एमआरआई स्कैनर मशीन की सुविधा है। जो मस्तिष्क रोगियों के मरीजों की सटीक कारणों की पकड़ में कमजोर साबित हो रही है। ऐसे में एम्स जल्द 7 टेस्ला एमआरआई स्कैनर मशीन लगाएगा। इसकी क्षमता मौजूद मशीन से दोगुनी से ज्यादा होगी। इसमें उच्च-शक्ति वाले चुंबकीय क्षेत्र, सूक्ष्म न्यूरोइमेजिंग क्षमताएं होंगी। जो बारिक रोग की पहचान भी आसानी से कर सकेगी। एम्स के न्यूरो साइंस सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. एसबी गायकवाड़ ने बताया कि एम्स में अभी पांच मशीनें हैं। इनकी क्षमता तीन टेस्ला तक है। इसकी मदद से मस्तिष्क के गंभीर रोगों की पकड़ करना मुश्किल होता है।इस समस्या को देखते हुए एम्स 7 टेस्ला एमआरआई स्कैनर लेने की विचार कर रहा है।
33 फीसदी में दवा नहीं करती काम
डॉ. गायकवाड़ ने कहा कि मिर्गी के 33 फीसदी मामलों में दवा काम नहीं करती। ऐसे में सर्जरी ही एक विकल्प रह जाता है। इस सर्जरी के लिए कारणों की पकड़ के लिए सूक्ष्म जांच की जरूरत है। यदि जांच के दौरान रोग के लिए जिम्मेदार कारणों का पता नहीं चलता तो सर्जरी खराब हो सकती है। इससे मरीज में लकवा भी हो सकता है।
44 फीसदी में समस्या गंभीर
डॉ. गायकवाड़ ने कहा कि एम्स में मिर्गी के 60 मरीजों पर तीन साल तक एक अध्ययन किया गया। इसमें पहले 3 टेस्ला एमआरआर स्कैनर से जांच की गई। इस जांच में कोई ठोस कारण का पता नहीं चला। जब उन्हीं मरीजों का इसके अलावा दूसरे अन्य साधनों की मदद से जांच की गई तो 44 फीसदी मरीजों में रोग गंभीर पाया गया।
क्या है 7-टेस्ला
7-टेस्ला एमआरआई की आधुनिक मशीन है। इसमें इमेजिंग उन्नत विवरण के साथ मिलता है। इसमें ग्रे और सफेद पदार्थ के बीच धुंधलापन कम रहता है जिस कारण रोग की पकड़ आसान हो जाती है। वहीं, 3-टेस्ला इसका छोटा वर्जन है। इसमें एमआरआई अदृश्य या थोड़ा अस्पष्ट होता है। फिलहाल 7-टेस्ला का इस्तेमाल अमेरिका व यूरोप में किया जा रहा है।
आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी का अधिकार देने से आई परेशानियों पर मंथन
नई दिल्ली। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारी की बैठक हुई। इस मौके पर प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि लगातार कोशिशों से लोगों में जागरूकता आई है औरयूनानी चिकित्सा को बढ़ावा मिला है।
बैठक में आयुर्वेद की तरह यूनानी, योग, सिद्धा और सूया रिग्पा को समान महत्व दिया गया। बीते साल केंद्रीय आयुष विभाग की बैठक में आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी करने का अधिकार दिया गया था। इससे यूनानी और दूसरी देसी चिकित्सा के डॉक्टरों को परेशानी हुई। इसको लेकर ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा। बैठक में ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के महासचिव डॉ. सैयद अहमद खान ने प्रांतीय रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि गुजरात, असम और बंगाल प्रांत में यूनानी चिकित्सा की सबसे खराब स्थिति है। इसके अलावा बैठक में अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।















