दहेज हत्या में दोषी पति और बुजुर्ग सास-ससुर को सजा, आठ साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला

अलीगढ़। चंडौस क्षेत्र में आठ साल पहले दहेज के लिए महिला की जलाकर हत्या के मामले में बुधवार को निर्णय आ गया। एडीजे प्रथम संजीव कुमार सिंह की अदालत ने पति को 10 वर्ष व बुजुर्ग सास-ससुर को सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है।तीनों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

एडीजीसी अमर सिंह तोमर ने बताया कि हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव पहाड़ीपुर निवासी तौहीद ने 12 मई 2016 को तहरीर दी थी। इसमें कहा था कि उनकी बहन फरजाना का निकाह जून 2014 में चंडौस क्षेत्र के गांव अजना रामपुर शाहपुर निवासी अकरम के साथ हुआ था। अकरम नोएडा में ठेकेदारी करता था।

निकाह के बाद ससुरालीजन अतिरिक्त दहेज में दो लाख रुपये की मांग को लेकर फरजाना को प्रताड़ित करने लगे। घटना से आठ दिन पहले अकरम ने फरजाना को दादरी के पास नेशनल हाईवे पर बाइक से गिरा दिया। इससे वह चोटिल हो गई। 11 मई 2016 को सुबह चार बजे ससुरालीजनों ने फरजाना पर मिट्टी का तेल छिड़क दिया। अकरम ने माचिस जलाकर आग लगा दी।

गंभीर हालत में उसे जेएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। पुलिस ने पति अकरम, सास बिलकिस व ससुर जब्बार खां के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया। 21 मई 2016 को फरजाना की मृत्यु हो गई, जिसके बाद हत्या की धारा बढ़ाई गई। पुलिस ने तीनों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया।अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों व महिला के मृत्युपूर्व बयानों के आधार पर तीनों को दोषी करार दिया। इसमें अकरम को 10 वर्ष की सजा सुनाई, जबकि बिलकिस व जब्बार के बुजुर्ग होने के चलते सात वर्ष कारावास की सजा से दंडित किया है।

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