ब्रेस्ट कैंसर आज के दौर में महिलाओं की सेहत के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हर साल दुनियाभर में लाखों महिलाएं इस गंभीर बीमारी की चपेट में आती हैं, और भारत में भी इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चिंता की बात यह है कि कई बार इसकी पहचान देर से होती है, जब इलाज का प्रभाव कम हो जाता है या संभावना ही समाप्त हो जाती है।
क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे कुछ ऐसे कारण होते हैं, जो हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली और आदतों से जुड़े होते हैं? यदि समय रहते इसके शुरुआती लक्षणों को पहचाना जाए, तो न केवल इसका इलाज संभव है बल्कि इससे बचाव भी किया जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर कोई अचानक से होने वाली बीमारी नहीं है। इसके पीछे एक लंबी प्रक्रिया काम करती है, जो धीरे-धीरे शरीर में बदलाव लाती है।
दुख की बात यह है कि अधिकांश महिलाएं इन शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं, यह सोचकर कि शरीर में हो रहा कोई भी बदलाव सामान्य है। लेकिन यहीं से सबसे बड़ी चूक होती है। जागरूकता, नियमित जांच और सतर्कता ही इस बीमारी से लड़ने के सबसे बड़े हथियार हैं।
जेनेटिक कारण से होता हैं कैंसर
राजीव गांधी कैंसर हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ विनीत तलवार बताते हैं कि अगर आपके परिवार में किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर रहा है जैसे नानी, दादी, मां या बहन को, तो इसका रिस्क रहता है कि अपको भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है. इसका सीधा संबंध नहीं है लेकिन ये बीमारी आपके शरीर में कैंसर बनने के कारकों को बढ़ा सकती है जिस वजह से खतरा बन सकता है. ये सिर्फ बुढ़ापे में नहीं बल्कि 30 से 35 साल की महिलाओं में भी देखे गए हैं.
जीवनशैली और खानपान
ब्रेस्ट कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल और खानपान है.जीवनशैली में जिस तरह के नेगेटिव बदलाव हो रहे हैं वो इस रिस्क को बढ़ा रहे हैं. लगातार जंक फूड खाना, व्यायाम न करना, शराब का सेवन, स्मोकिंग, बढ़ता वजन और तनाव ये सब रिस्क फैक्टर्स हैं. शारीरिक गतिविधि में कमी और नींद पूरी न करना भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं.
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण-
- ब्रेस्ट के पास गांठ का बनना
- ब्रेस्ट या बाहों के पास गांठ होना
- ब्रेस्ट से कभी-कभी खून आना
- ब्रेस्ट का साइज एक दूसरे से अलग होना
- निप्पल में खिंचाव, दर्द या डिस्चार्ज रहना
- निप्पल या ब्रेस्ट का रंग बदलना
ये सभी अलर्ट देने वाले लक्षण हैं. लेकिन दुर्भाग्य से महिलाएं इन्हें नजरअंदाज़ कर देती हैं या शर्म के मारे डॉक्टर से बात नहीं करतीं. अगर आप इन लक्षणों को पहचान कर समय रहते डॉक्टर से सलाह लें तो ब्रेस्ट कैंसर को शुरुआती स्टेज में ही रोका या ठीक किया जा सकता है. नियमित रूप से सेल्फ-एग्ज़ामिनेशन, हर साल मैमोग्राफी (40 की उम्र के बाद) और हेल्दी लाइफस्टाइल ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे असरदार तरीका है.















