तीन तलाक देने के आरोपी को हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इन्कार

हाईकोर्ट ने तीन तलाक देने के आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा इस मामले में तथ्यों के समीक्षा की आवश्यकता है जो, जो ट्रायल कोर्ट बेहतर तरीके से कर सकता है। इस दौरान कोर्ट ने याची को दूसरा विवाह करने के मामले में जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है।न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की कोर्ट ने गोरखपुर के जान मोहम्मद की याचिका पर यह आदेश दिया। मामले में अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने पक्ष रखा।

गोरखपुर निवासी जान मोहम्मद पर उनकी पत्नी ने मुस्लिम महिला संरक्षण अधिनियम और पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। जिस पर संज्ञान लेते हुए एसीजेएम कोर्ट गोरखपुर ने समन जारी कर तलब किया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

याची के अधिवक्ता दलील दी कि उसने तीन तलाक नहीं दिया है। बल्कि नियम अनुसार एक-एक माह के अंतराल पर तीन बार नोटिस देने के बाद तलाक दिया है, जो मान्य है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया और दलील दी कि महिला और उसके बेटे के बयान में भी इस बात की पुष्टि हुई कि तीन तलाक दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से तलाक के तीन बार नोटिस देने और पत्नी की ओर से लगाए गए आरोप की समीक्षा करने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है। कोर्ट ने अन्य तथ्यों पर विचार करते हुए समन आदेश को रद्द कर दिया है तथा तीन तलाक के मामले पर अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष जाने का निर्देश दिया है।

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