हाई कोर्ट ने माना अमानत में ख़यानत-केस दर्ज करने का आदेश

बांदा। जमीन बेचने का करार कर, उसी जमीन पर बैंक लोन लेने को लेकर हाई कोर्ट ने माना अमानत में ख़यानत, हाईकोर्ट के द्वारा दोषी के विरुद्ध दिया आपराधिक केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
मामला जनपद के मतौंध कस्बे का है। कस्बे के रहने वाले रामकृपाल सिंह ने गिरजा शंकर द्विवेदी के पक्ष में अपनी जमीन बेचने के लिए वर्ष 1998 रजिस्टर्ड रूप से करार किया था । इसके बाद उसी जमीन को 1999 में तीसरे पक्ष को बेच दिया गया। जिसपर गिरजा शंकर द्विवेदी ने सिविल कोर्ट में केस दाखिला कर दिया। जो वादी की मामले के वादी रहे गिरजा शंकर के पक्ष में रहा। इसी दौरान राम कृपाल सिंह ने एक साथ दो बैंकों जिसमें आर्यावर्त बैंक शाखा पल्हरी एवं आर्यावर्त बैंक भवानीपुरवा से 375000 का बैंक से लोन लेकर जमीन को बंधक रख दिया गया। वादी गिरजा शंकर द्विवेदी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बांदा की कोर्ट में 156 (3) का आवेदन कर दिया। जिसे मैजिस्ट्रेट ने 30 जुलाई वर्ष 2024 यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि मामला सिविल प्रकृति का है। वादी गिरजा शंकर ने इस आदेश के खिलाफ वह उच्च न्यायालय में रिवीजन दाखिल करवा दिया।जिसमें हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने वादी के अधिवक्ता जयंत कुमार द्विवेदी के तर्कों से सहमति जताते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को विधि विरुद्ध माना और यह भी बताया गया की मामला सिविल प्रकृति का नहीं है। अपितु अमानत में ख़यानत का है,और उसे समाप्त कर मामले को मैजिस्ट्रेट के सामने वापस भेजते हुए नया आदेश पारित करने का आदेश दिया है।

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