खाड़ी फंडिंग का खुलासा: डॉ. शाहीन के लॉकर से बरामद हुई बड़ी रकम, जांच तेज

सफेदपोश आतंकी के रूप में पहचाने जा रहे डॉ. शाहीन के खिलाफ जांच एजेंसियों ने अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय सुराग हासिल किया है। हाल ही में उनके बैंक लॉकर की तलाशी में 18 लाख रुपये नकद, खाड़ी देशों की भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा और सोने के कई बिस्किट बरामद हुए। इस बरामदगी ने न केवल जांच को नई दिशा दी है, बल्कि यह भी साबित किया है कि शाहीन को खाड़ी देशों से लगातार फंडिंग मिल रही थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, लॉकर से मिली रकम और विदेशी नोट इस बात का संकेत हैं कि शाहीन लंबे समय से बाहरी नेटवर्क के संपर्क में था। खाड़ी देशों की मुद्रा की मौजूदगी यह बताती है कि उसे वहां से हवाला या किसी अन्य अवैध चैनल के माध्यम से धन पहुंचाया जा रहा था। अब यह जांच का मुख्य बिंदु बन गया है कि आखिरकार यह पैसा किस उद्देश्य से भेजा जा रहा था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। एजेंसियों को शक है कि यह फंड किसी बड़े मॉड्यूल की गतिविधियों को संचालित करने के लिए उपयोग किया जा रहा था, जिसमें स्थानीय स्तर पर मददगार भी हो सकते हैं।

इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। जांच टीमें जल्द ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य स्टाफ से दोबारा पूछताछ करेंगी। पहले चरण की पूछताछ में कुछ अनियमितताओं की ओर संकेत मिला था, लेकिन अब जब शाहीन के पास से इतनी बड़ी रकम मिली है, तो एजेंसियां मान रही हैं कि विश्वविद्यालय के अंदर से भी उसे संरक्षण या सहयोग मिल रहा था। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर किसके माध्यम से शाहीन तक 18 लाख रुपये पहुंचे और इतने लंबे समय तक किसी को इसकी भनक कैसे नहीं लगी।

सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि शाहीन ने कितने समय में इतनी रकम इकट्ठी की और यह धन किस तरह इस्तेमाल किया गया। सोने के बिस्किटों की बरामदगी यह दर्शाती है कि वह धन को छिपाने और सुरक्षित रखने के तरीके भली-भांति जानता था। यह भी माना जा रहा है कि शाहीन ने खाड़ी देशों की अपनी यात्राओं के दौरान कई संदिग्ध व्यक्तियों से संपर्क बनाया होगा, जिनके जरिए उसे वित्तीय सहायता मिल रही थी।

जांच एजेंसियों ने मामले को अतिसंवेदनशील मानते हुए कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सूचनाएं साझा की हैं। आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि बरामद दस्तावेजों की जांच भी जारी है। फिलहाल, शाहीन और उसके नेटवर्क पर शिकंजा कसता दिख रहा है। यह मामला साफ कर रहा है कि शिक्षा और शोध संस्थानों की आड़ में किस तरह पूरी तरह से संगठित नेटवर्क फैल रहे हैं, जिन्हें अब निर्णायक रूप से उजागर करने की जरूरत है।

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